भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) बिल, 2013

प्रश्न-भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विल, 2013 के संबंध में, निम्न कथनों पर विचार करें-
(1) यह विधेयक, भ्रष्टाचार निवारण एक्ट-1988 को संशोधित करता है।
(2) विधेयक (Bill) में रिश्वत लेना और रिश्वत देना दोनों को अपराध माना गया है।
(3) हाल ही में, जुलाई, 2018 में यह विधेयक राज्य सभा में पारित किया गया है।
सही विकल्प का चुनाव करें-

(a) केवल 1
(b) केवल 2,3
(c) केवल 1,3
(d) सभी सहीं हैं।
उत्तर-(d)
संबंधित तथ्य

  • 19 जुलाई, 2018 को भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) बिल, 2013 राज्य सभा में पारित किया गया है। यह विधेयक (Bill) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 का संवर्धित रूप है।
  • ध्यातव्य है कि यह विधेयक, 19 अगस्त, 2013 को तत्कालीन कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के मंत्री वी. नारायण सामी द्वारा राज्य सभा में पेश किया गया था।
  • विधेयक के मुख्य प्रावधान-
  • विधेयक में रिश्वत लेने संबंधी प्रावधान को व्यापक बनाया गया हैं और सजा का प्रावधान 3 से 7 वर्ष है, जबकि 1988 के अधिनियम में सजा की अवधि 6 महीने से पांच वर्ष तक निर्धारित है।
  • विधेयक रिश्वत देने संबंधी नए प्रावधान को शामिल करता है और सजा की अवधि 3 से 7 वर्ष व साथ में जुर्माना है।
  • विधेयक, सभी प्रकार के अपराधों के लिए उकसाना, दंडनीय अपराध मानता है और सजा का प्रावधान तीन से सात वर्ष जबकि 1988 के अधिनियम में सिर्फ रिश्वत लेने के लिए उकसाना, अपराध माना गया है।
  • 1988 के अधिनियम के तहत केंद्र/राज्य सरकार की पूर्व अनुमति बिना कार्यरत सरकारी अधिकारी पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, जबकि इस विधेयक के द्वारा अवकाश प्राप्त अधिकारियों को भी संरक्षण प्रदान किया गया है।
  •  विधेयक, रिश्वत में लिए गए धन को जब्त करने का प्रावधान करता है। जब यह माना जा रहा हो कि अपराध किया गया है।

लेखक सचिन कुमार वर्मा

संबंधित लिंक…
http://www.prsindia.org/billtrack/theprevention-of-corruption-amendment-bill-2013-2865/
http://www.prsindia.org/uploads/media/Corruption/Hindi%20Bill%20Summary%20–%20PCA%20Bill,%202013.pdf
https://www.business-standard.com/article/economy-policy/anti-graft-bill-passed-by-parliament-shields-govt-staff-your-full-brief-118072500191_1.html

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