प्रश्न – स्वस्थ भारत पोर्टल के संबंध में कौन सा तथ्य सही नहीं है?
(a) इसका शुभारंभ 30 अप्रैल, 2026 को किया गया।
(b) इसका शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया।
(c) इसे केवल निजी अस्पतालों के लिए विकसित किया गया है।
(d) इसे वन-स्टॉप एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 30 अप्रैल, 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘स्वस्थ भारत पोर्टल’ का शुभारंभ किया।
- इसका शुभारंभ उन्होंने नवाचार एवं समावेशिता विषय पर 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान किया।
- स्वस्थ भारत पोर्टल को एक वन-स्टॉप एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है।
- यह पोर्टल मौजूदा स्वास्थ्य कार्यक्रमों की डिजिटल प्रणालियों को एपीआई
- आधारित फेडरेटेड आर्किटेक्चर के माध्यम से जोड़ता है।
- इससे विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, यानी आपसी समन्वय और डेटा आदान-प्रदान की क्षमता बढ़ेगी।
- इस पोर्टल के माध्यम से कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एक ही डिजिटल इंटरफेस पर लाया जाएगा।
- इससे स्वास्थ्यकर्मियों को अलग-अलग पोर्टल पर बार-बार लॉगिन करने और समान जानकारी कई बार दर्ज करने की आवश्यकता कम होगी।
- इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों का बोझ भी कम होगा।
- भारत में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और चिकित्सा अधिकारी जैसे फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर अक्सर कई अलग-अलग एप्लिकेशन पर रिपोर्टिंग करने में काफी समय लगाते हैं।
- स्वस्थ भारत पोर्टल उन्हें एक ही प्लेटफॉर्म पर आवश्यक सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराएगा।
- साथ ही, इसमें डेटा विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स भी उपलब्ध होंगे, जिनसे स्थानीय स्तर पर निगरानी, योजना निर्माण और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना आसान होगा।
- यह पोर्टल एबीडीएम यानी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अनुरूप है और एबीएचए (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) के साथ एकीकरण का समर्थन करता है।
- इससे मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का सुरक्षित और सहज आदान-प्रदान संभव होगा।
- आगे चलकर इसे स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रजिस्ट्री (एचपीआर) और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री (एचएफआर) जैसी राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों से भी जोड़ा जाएगा।
- स्वस्थ भारत पोर्टल से सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली में कई स्तरों पर दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
- इससे अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए बनाए गए स्वतंत्र होस्टिंग, स्टोरेज और कंप्यूट संसाधनों की आवश्यकता कम होगी।
- समान लाभार्थी डेटा को बार-बार दर्ज करने की जगह एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जा सकेगा।
- साथ ही, अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग विकास और रखरखाव टीमों की आवश्यकता भी घटेगी।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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