स्वदेशी एवं लुप्तप्राय भाषा प्रयोगशाला (आईईएलएबी)

प्रश्न – फरवरी 2026 में करूर वैश्य बैंक (KVB) द्वारा मद्रास विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में स्थापित स्वदेशी एवं लुप्तप्राय भाषा प्रयोगशाला (IELAB) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य सही नहीं है?
(a) यह प्रयोगशाला दक्षिण भारत की पहली ऐसी सुविधा है जो स्वदेशी एवं लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण और अकादमिक अध्ययन पर केंद्रित है।
(b) इस प्रयोगशाला की स्थापना करूर वैश्य बैंक के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम के अंतर्गत की गई है।
(c) इस परियोजना को गैबो एलायंस फाउंडेशन के माध्यम से कार्यान्वित किया गया है।
(d) अपने प्रारंभिक चरण में यह प्रयोगशाला केवल संस्कृत और पाली भाषाओं के अध्ययन पर केंद्रित होगी।

उत्तर – (d)


व्याख्यात्मक उत्तर

  • फरवरी, 2026 में करूर वैश्य बैंक (केवीबी) ने मद्रास विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय परिसर में स्वदेशी एवं लुप्तप्राय भाषाओं की प्रयोगशाला (आईईएलएबी) की।
  • करूर वैश्य बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बी. रमेश बाबू ने आईईएलएबी का उद्घाटन किया।
  • बैंक के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के तहत समर्थित यह सुविधा दक्षिण भारत की पहली ऐसी प्रयोगशाला है जो स्वदेशी एवं लुप्तप्राय भाषाओं के प्रलेखन, संरक्षण एवं अकादमिक अध्ययन पर केंद्रित है।
  • इस प्रयोगशाला की स्थापना करूर वैश्य बैंक के सीएसआर सहयोग से की गई है और इसे पंजीकृत गैर-लाभकारी भागीदार गैबो (Gabo) एलायंस फाउंडेशन के माध्यम से कार्यान्वित किया गया है।
  • आईईएलएबी को अत्याधुनिक अनुसंधान और प्रलेखन सुविधा के रूप में परिकल्पित किया गया है जो अकादमिक कठोरता को प्रौद्योगिकी-सक्षम संरक्षण के साथ जोड़ती है।
  • यह प्रयोगशाला भाषाओं, मौखिक इतिहासों, लोककथाओं, अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रथाओं के श्रव्य-दृश्य अभिलेखन संग्रह पर ध्यान केंद्रित करेगी, साथ ही संरचित भाषाई अनुसंधान और प्रकाशनों को भी सक्षम बनाएगी।
  • सामुदायिक सहभागिता पर विशेष बल दिया जाएगा, जिसमें स्वदेशी बुजुर्ग, विद्वान और छात्र पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान हस्तांतरण और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करेंगे।
  • अपने प्रारंभिक चरण में, प्रयोगशाला सोलिगा, कोटा, टोडा, इरुला और बदागा (Badaga) जैसी भाषाओं का दस्तावेजीकरण और अध्ययन करेगी, जो दक्षिण भारत के सांस्कृतिक परिदृश्य में गहराई से निहित हैं।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/madras-university-kvb-establish-lab-to-study-endangered-indigenous-languages/article70647745.ece