प्रश्न – स्माइल (SMILE) मिशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –
1 स्माइल (SMILE), चीनी विज्ञान अकादमी (सीएएस) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का संयुक्त मिशन है।
2 इसका उद्देश्य पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर और सौर पवन की अंतःक्रिया का अध्ययन करना है।
3 यह मिशन मंगल के वायुमंडल का एक्स-रे अध्ययन करेगा।
सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – (a)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 19 मई, 2026 को चीनी विज्ञान अकादमी (सीएएस) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के संयुक्त मिशन सोलर विंड मैग्नेटोस्फीयर आयनोस्फीयर लिंक एक्सप्लोरर (स्माइल) को मंगलवार को फ्रेंच गुयाना के यूरोपीय अंतरिक्ष बंदरगाह से वेगा-सी रॉकेट द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया ।
- तीन चरणों वाले वेगा सी रॉकेट ने प्रक्षेपण के लगभग 56 मिनट बाद पृथ्वी से 439 मील (707 किलोमीटर) ऊपर एक वृत्ताकार कक्षा में स्माइल को स्थापित किया।
- प्रक्षेपण के बाद उपग्रह अपनी नियोजित कक्षा में पहुंच गया, उसके सौर पैनल सफलतापूर्वक खुल गए और सभी प्रणालियां सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं।
- रॉकेट से प्रक्षेपण और पृथक्करण के बाद, स्माइल से पहला सिग्नल ऑस्ट्रेलिया में स्थित ईएसए के न्यू नोर्सिया ग्राउंड स्टेशन को सुबह 6:48 सीईएस पर प्राप्त हुआ।
- स्माइल मिशन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि सौर पवन (Solar Wind) पृथ्वी के चुंबकीय वातावरण यानी मैग्नेटोस्फीयर के साथ कैसे परस्पर क्रिया करती है।
- पृथ्वी के चारों ओर मौजूद यह अदृश्य चुंबकीय क्षेत्र एक सुरक्षात्मक ढाल की तरह काम करता है और सूर्य से आने वाले तीव्र आवेशित कणों को काफी हद तक मोड़ देता है।
- यह पृथ्वी के चुंबकीय कवच का एक्स-रे दृष्टि से अध्ययन करने वाला पहला मिशन होगा , जिससे यह पता चलेगा कि सौर पवन का इस पर कहाँ और कैसे प्रभाव पड़ता है।
- स्माइल उपग्रह वैज्ञानिकों को पहली बार पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर की पैनोरमिक इमेजिंग करने में सक्षम बनाएगा।
- इससे सौर पवन द्वारा आकार दिए गए पृथ्वी के चुंबकीय कवच की बड़ी संरचना को वैश्विक स्तर पर देखा जा सकेगा।
- इसकी घुमावदार सीमा देखने में मुस्कान जैसी प्रतीत होती है, इसी कारण मिशन का नाम स्माइल रखा गया है।
- स्माइल मिशन में चार उन्नत वैज्ञानिक उपकरण लगाए गए हैं।
- इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है सॉफ्ट एक्स-रे इमेजर (SXI)।
- ईएसए की ओर से, इस कैमरे को ब्रिटेन में लीसेस्टर विश्वविद्यालय द्वारा मुलार्ड स्पेस साइंस लेबोरेटरी और ओपन यूनिवर्सिटी के सहयोग से विकसित और निर्मित किया गया था, जिसमें यूरोप भर के कई अन्य संस्थानों ने भी सहयोग किया था।
- यह उपकरण उन एक्स-रे संकेतों का पता लगाएगा जो तब उत्पन्न होते हैं जब सौर पवन के आवेशित कण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में मौजूद तटस्थ कणों से टकराते हैं।
- इससे वैज्ञानिक पहली बार मैग्नेटोस्फीयर की अदृश्य सीमाओं को प्रत्यक्ष रूप से देख पाएंगे।
- स्माइल नामक मिशन पराबैंगनी दृष्टि का उपयोग करके एक बार में 45 घंटे तक उत्तरी प्रकाश को रिकॉर्ड करेगा, जिससे यह इतने लंबे समय तक अरोरा का अवलोकन करने वाला पहला मिशन बन जाएगा, और वर्ष 2008 के बाद से पराबैंगनी प्रकाश में उत्तरी ध्रुव के चारों ओर अरोरा के पूरे चक्र का अवलोकन करने वाला पहला मिशन होगा।
- अगले महीने के दौरान, स्माइल 11 इंजन बर्न के माध्यम से धीरे-धीरे अपनी ऊंचाई बढ़ाएगा, और अंततः एक अत्यंत अंडाकार कक्षा में पहुंच जाएगा जो इसे उत्तरी ध्रुव से 121,000 किमी ऊपर ले जाएगी ताकि डेटा एकत्र किया जा सके, और फिर दक्षिणी ध्रुव से 5000 किमी ऊपर उतरकर पृथ्वी पर उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे वैज्ञानिकों को कुशलतापूर्वक डेटा पहुंचाया जा सके।
- पेलोड मॉड्यूल और एक्स-रे कैमरा दोनों के निर्माण में 14 यूरोपीय देशों के संस्थानों और कंपनियों का योगदान रहा, जिनमें यूनाइटेड किंगडम और स्पेन का योगदान सबसे अधिक रहा।
- स्माइल (SMILE) का पूर्ण रूप है — Solar wind Magnetosphere Ionosphere Link Explorer।
- यह ईएसए और सीएएस का संयुक्त मिशन है।
- इसका उद्देश्य सौर पवन, पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर और आयनोस्फीयर के बीच संबंधों का अध्ययन करना है।
- यह मिशन अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है, जिससे उपग्रह, संचार, नेविगेशन और विद्युत ग्रिड जैसी महत्त्वपूर्ण प्रणालियों की सुरक्षा बढ़ाई जा सकेगी।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
संबंधित लिंक भी देखें…
https://www.esa.int/Science_Exploration/Space_Science/Smile/Smile_set_to_launch_on_19_May