स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान को सुदृढ़ करने के लिए स्टार्टअप मान्यता रूपरेखा में संशोधन

प्रश्न – भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप मान्यता ढांचे में किए गए संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) स्टार्टअप के रूप में मान्यता हेतु वार्षिक टर्नओवर सीमा को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
(b) डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए पंजीकरण की तिथि से समय सीमा को 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष कर दिया गया है।
(c) डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अधिकतम टर्नओवर सीमा 200 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
(d) बहु-राज्य सहकारी समितियाँ, यदि अन्य शर्तें पूरी करती हैं, तो स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकती हैं।
उत्तर – (c)


व्याख्यात्मक उत्तर

  • भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा देश को वैश्विक नवाचार केंद्र, विनिर्माण-आधारित अर्थव्यवस्था और उभरती प्रौद्योगिकियों के हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्टार्टअप मान्यता ढांचे में संशोधन किया है।
  • यह संशोधन ऐसे समय में किया गया है जब स्टार्टअप इंडिया पहल अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रही है।
  • संशोधित ढांचे का उद्देश्य संस्थापकों के लिए अधिक पूर्वानुमेय, समावेशी और भविष्य-उन्मुख नीति वातावरण प्रदान करना तथा उच्च-प्रौद्योगिकी और अनुसंधान-गहन क्षेत्रों में दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करना है।
  • स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के निरंतर विकास और उद्यमों की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु वार्षिक टर्नओवर सीमा को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया है।
  • यह संशोधन विभिन्न विकास-चरणों पर कार्यरत नवाचार-आधारित उद्यमों को अधिक समय तक नीति-समर्थन प्रदान करने में सहायक होगा।
  • इसके अतिरिक्त, सरकार ने कटिंग-एज एवं ब्रेकथ्रू प्रौद्योगिकियों पर कार्य करने वाले उद्यमों के लिए “डीप टेक स्टार्टअप” नामक एक पृथक श्रेणी की शुरुआत की है।
  • इस श्रेणी की पहचान और विशेषताओं को संबंधित मंत्रालयों, विभागों तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया है।
  • डीप टेक स्टार्टअप्स की लंबी विकास अवधि, उच्च अनुसंधान एवं विकास लागत तथा पूंजी-गहन प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, इनके लिए पात्रता मानकों का विस्तार किया गया है।
  • इसके अंतर्गत पंजीकरण की तिथि से समय सीमा को 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष तथा टर्नओवर सीमा को 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों तथा सामुदायिक-आधारित उद्यमों में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, सरकार ने सहकारी संस्थाओं को भी स्टार्टअप मान्यता के दायरे में शामिल किया है।
  • इसके तहत बहु-राज्य सहकारी समितियाँ, जो बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत हैं, तथा राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारी अधिनियमों के अंतर्गत पंजीकृत सहकारी समितियाँ, अन्य निर्धारित शर्तों की पूर्ति करने पर स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकेंगी।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2224199&reg=3&lang=2