प्रश्न – मिशन “सेनेहजोरी” के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –
1. यह असम के मूगा सिल्क क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लक्ज़री टेक्सटाइल इकोसिस्टम में बदलने की पहल है।
2. इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा असम सरकार और अन्य संस्थाओं के समन्वय से संचालित किया जाएगा।
3. इसका उद्देश्य केवल मूगा सिल्क के निर्यात को बढ़ाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – (a)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 2 जून, 2026 को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (एमडीओएनईआर) ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने असम के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर मिशन “सेनेहजोरी” – असम मूगा सिल्क यूएसपी का शुभारंभ किया।
- यह एक व्यापक क्लस्टर-आधारित पहल है।
- यह पहल असम के प्रसिद्ध मूगा सिल्क क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, उच्च-मूल्य वाले लक्ज़री टेक्सटाइल इकोसिस्टम में बदलने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
- मिशन सेनेहजोरी को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा असम सरकार, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय तथा अन्य केंद्रीय मंत्रालयों और संस्थाओं के समन्वय से संचालित किया जाएगा।
- इसका उद्देश्य मूगा सिल्क की पूरी मूल्य-श्रृंखला चेन को मजबूत करना है।
- इसमें होस्ट प्लांट की खेती, रेशमकीट बीज उत्पादन, रीलिंग, बुनाई, ब्रांडिंग, निर्यात संवर्धन, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और पर्यटन जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
- मूगा सिल्क दुनिया का एकमात्र प्राकृतिक रूप से सुनहरे रंग का रेशम है और यह भारत का पहला जीआई टैग प्राप्त रेशम भी है।
- असम में लगभग 2.6 लाख रेशमकीट पालक और बुनकर परिवार इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
- अपनी दुर्लभता और वैश्विक पहचान के बावजूद यह क्षेत्र अभी भी अपनी वास्तविक आर्थिक क्षमता तक नहीं पहुंच पाया है।
- मिशन सेनेहजोरी का लक्ष्य इसी मूल्य-अंतर को कम करना और मूगा सिल्क को प्रीमियम, प्रमाणित तथा निर्यातोन्मुख अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना है।
- यह मिशन क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण अपनाएगा।
- इसके अंतर्गत जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची जैसे प्रमुख मूगा सिल्क उत्पादक जिलों को शामिल किया जाएगा।
- इस पहल के तहत होस्ट प्लांट पारिस्थितिकी को मजबूत करने, आधुनिक रीलिंग अवसंरचना स्थापित करने, किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने, कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाने, जीआई प्रमाणीकरण लागू करने और ‘सेनेहजोरी’ नामक एकीकृत ब्रांड पहचान के तहत वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने पर जोर दिया जाएगा।
- मिशन सेनेहजोरी के लिए तीन वर्षों में लगभग 396 से 411 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है, जिसमें 136 से 151 करोड़ रुपये का योगदान पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
- इस मिशन का उद्देश्य उत्पादकों की आय बढ़ाना, असम को लक्ज़री मूगा सिल्क का वैश्विक केंद्र बनाना और राज्य को रेशम आधारित सांस्कृतिक तथा अनुभवात्मक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
- इस मिशन के अंतर्गत वर्ष 2028 तक कई प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
- इनमें पांच आधुनिक मूगा रीलिंग इकाइयों और एक मूगा स्पन मिल की स्थापना, 30 किसान उत्पादक संगठनों और 1,180 से अधिक किसान हित समूहों का गठन, 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सोम और सोआलू होस्ट प्लांट का पुनर्जीवन, व्यापार में आने वाले 80 प्रतिशत से अधिक मूगा सिल्क का जीआई आधारित प्रमाणीकरण, 8,000 से अधिक परिवारों के लिए डिजिटल ट्रेसबिलिटी व्यवस्था और मूगा सिल्क निर्यात को प्रतिवर्ष 2,000 किलोग्राम से अधिक तक बढ़ाना शामिल है।
- इस मिशन में सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को भी विशेष महत्व दिया गया है।
- इसके तहत मूगा सिल्क ट्रेल, सिल्क टूरिज्म पार्क और वार्षिक मूगा उत्सव जैसे कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।
- इससे असम को रेशम विरासत पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित करने में सहायता मिलेगी।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
संबंधित लिंक भी देखें…
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2268097®=48&lang=2