सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘उद्योग’ की परिभाषा संबंधी मानक परिष्कृत

प्रश्न – उत्तर प्रदेश राज्य बनाम जयबीर सिंह मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए —

  1. सर्वोच्च न्यायालय ने बैंगलोर वाटर सप्लाई मामले में प्रतिपादित ‘ट्रिपल टेस्ट’के मूल ढाँचे को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
  2. किसी गतिविधि को ‘उद्योग’ मानने के लिए लाभ कमाने का उद्देश्य अथवा पूँजी निवेश अनिवार्य नहीं है।
  3. औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंतर्गत लंबित मामलों का निपटारा पुराने ट्रिपल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा।
  4. संविधान पीठ ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 2(p) में दी गई ‘उद्योग’की परिभाषा की भी व्याख्या की है।
    उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
    (a) केवल 1 और 2
    (b) केवल 2 और 3
    (c) केवल 1, 2 और 3
    (d) उपर्युक्त सभी
    उत्तर – (b)
    व्याख्यात्मक उत्तर
  • 20 अगस्त, 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम जयबीर सिंह मामले में ‘उद्योग’की परिभाषा पर महत्त्वपूर्ण निर्णय दिया।
  • न्यायालय ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(j) के अंतर्गत वर्ष 1978 के बैंगलोर वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा मामले में निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ के मूल ढाँचे को सही माना।
  • हालांकि, इसके कुछ घटकों और सहायक दिशानिर्देशों को अधिक स्पष्ट बनाने के लिए परिष्कृत किया गया।
  • वर्ष 1978 के ट्रिपल टेस्ट के अनुसार किसी गतिविधि को ‘उद्योग’ मानने के लिए उसका व्यवस्थित एवं संगठित होना, नियोक्ता और कर्मचारियों के सहयोग से संचालित होना तथा मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वस्तुओं अथवा सेवाओं के उत्पादन या वितरण से संबंधित होना आवश्यक है।
  • इसके लिए लाभ कमाने का उद्देश्य या पूँजी निवेश अनिवार्य नहीं है।
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि परिष्कृत परीक्षण मुख्यतः भावी प्रभाव से लागू होगा।
  • औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंतर्गत लंबित मामलों का निपटारा पुराने ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ही किया जाएगा।
  • अंतिम रूप से निपटाए जा चुके मामलों (Awards’ Settlements) निर्णयों और समझौतों को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
  • संविधान पीठ ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 2(p) में दी गई ‘उद्योग’ की परिभाषा की व्याख्या नहीं की।
  • नई संहिता की व्याख्या उसके अपने शब्दों और संदर्भ के आधार पर स्वतंत्र रूप से की जाएगी।
  • इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने 1978 के मानक को समाप्त नहीं किया, बल्कि उसके मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए उसे परिष्कृत किया है।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://newsonair.gov.in/supreme-court-upholds-broad-interpretation-of-industry-under-industrial-disputes-act

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