सतत ऑक्सीजन इलेक्ट्रोकैटलिसिस हेतु आयरन-डोप्ड उत्प्रेरक विकसित

प्रश्न – निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –

  1. 14 मई, 2025 को सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस) के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक (catalyst) विकसित किया है।
  2. बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है।
    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
    (a) 1 और 2 दोनों (b) केवल 1
    (c) केवल 2 (d) इनमें से कोई नहीं
    उत्तर – (a)
    व्याख्यात्मक उत्तर
  • 14 मई 2025 को सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस) के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक (catalyst) विकसित किया है।
  • सीईएनएस द्वारा विकसित नया उत्प्रेरक अल्प मात्रा में आयरन (Fe) जोड़कर निकेल सेलेनाइड का उपयोग करता है।
  • यह उत्प्रेरक ऑक्सीजन से संबंधित महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाओं (oxygen-related catalytic reactions) को तेज़, सस्ता, किफ़ायती और अधिक कुशल बनाता है।
  • ऑक्सीजन से जुड़ी इलेक्ट्रोकैटलिसिस प्रक्रिया कई स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का आधार हैं, जिनमें हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए पानी को विभाजित करना, स्वच्छ ईंधन बनाना और हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे रसायनों का निर्माण करना शामिल है।
  • शोधकर्ताओं ने मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOF) नामक विशेष सामग्री से शुरुआत की, जो कि अत्यंत छिद्रपूर्ण और रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए उपयुक्त होती है, लेकिन विद्युत प्रवाहकता कम होती है।
  • यद्यपि कि उन्होंने इसे पायरोलिसिस (pyrolysis) नामक प्रक्रिया से कार्बन-समृद्ध सामग्री में बदला, जिससे इसकी विद्युत प्रवाहकता में सुधार हुआ, तत्पश्चात उसमें सेलेनियम जोड़ा गया और दो प्रमुख उत्प्रेरक से तैयार हुए।
  • शोधकर्ताओं द्वारा किए गए व्यापक परीक्षण से पता चला कि उत्प्रेरक, Nix Fe1-xSe2–NC@400 का प्रदर्शन बेहतर रहा।
  • ओईआर प्रक्रिया के लिए, इसे काफी कम ऊर्जा (कम ओवरपोटेंशियल) की आवश्यकता थी और 70 घंटों में बेहतर स्थिरता का प्रदर्शन किया, जो पारंपरिक रूथेनियम-आधारित उत्प्रेरक का बेहतर प्रदर्शन करता है।
  • हाइड्रोजन पेरोक्साइड उत्पादन के लिए ओआरआर परीक्षणों में इस उत्प्रेरक का उद्योग-मानक प्लैटिनम-आधारित उत्प्रेरक प्रदर्शन भी बेहतर रहा, जिससे शानदार प्रतिक्रिया गति और उच्च दक्षता प्राप्त हुई।
  • इस सफलता से उद्योगों को एक कम लागत वाला, अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प मिल सकता है। इसका उपयोग हाइड्रोजन उत्पादन, स्वच्छ ईंधनों और रासायनिक निर्माण में बड़े स्तर पर किया जा सकता है।
  • इस सफलता से उद्योगों को एक कम लागत वाला, अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प मिल सकता है। इसका उपयोग हाइड्रोजन उत्पादन, स्वच्छ ईंधनों और रासायनिक निर्माण में बड़े स्तर पर किया जा सकता है।
  • ध्यातव्य है कि बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://dst.gov.in/iron-doped-catalyst-developed-sustainable-oxygen-electrocatalysis

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2128675