प्रश्न – निम्न कथनों पर विचार कीजिये –
- 3 मार्च, 2026 को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व वन्यजीव दिवस’ (World Wildlife Day) मनाया गया
- वर्ष 2026 में इस दिवस का मुख्य विषय- “औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका का संरक्षण” है
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा कथन सही है ?
(a) केवल 1 (b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों (d) इनमे से कोई नहीं
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 3 मार्च‚ 2026 को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व वन्यजीव दिवस’ (World Wildlife Day) मनाया गया
- वर्ष 2026 में इस दिवस का मुख्य विषय- “औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका का संरक्षण” है
- यह दिवस वैश्विक स्तर पर विलुप्त संकटापन्न वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के संरक्षण की दिशा में जागरुकता लाने के लिए मनाया जाता है।
- भारत जैव विविधता से समृद्ध विश्व के 17 विशाल देशों में से एक है और विश्व की जैव-विविधता का 7% भाग इसी देश में है।
- यहां 15 कृषि-जलवायु क्षेत्र, 45,000 विभिन्न पौधों की प्रजातियां हैं जिनमें से 15,000 औषधीय पौधे हैं।
- इनमें से लगभग 8,000 प्रजातियों का उपयोग भारतीय चिकित्सा प्रणालियों और लोक चिकित्सा प्रणालियों में किया जाता है।
- भारत के लगभग 70% औषधीय और सुगंधित पौधे (एमएपी) पश्चिमी और पूर्वी घाट, हिमालय और अरावली क्षेत्र के उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाए जाते हैं।
- भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण ने 5,250 से अधिक पौधों की प्रजातियों की पहचान की है और विभिन्न रोगों के संबंध में उपयोग के लिए 9,567 से अधिक लोक दावों का प्रलेखण किया है।
- भारत इस समृद्ध विरासत की रक्षा के लिए कड़े कदम उठा रहा है।
- राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) की ओर से औषधीय पौधों के संरक्षण और सतत प्रबंधन के लिए समर्पित योजना चलाई जा रही है।
- इसके अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण, अनुसंधान और विपणन में सहायता प्रदान की जाती है।
- ये प्रयास औषधीय पौधों की अपनी समृद्ध विरासत की सुरक्षा के लिए भारत की मजबूत और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
- भारत द्वारा औषधीय और सुगंधित पौधों की अपनी समृद्ध विरासत को बचाने के लिए किए गए प्रमुख प्रयास –
- प्राकृतिक पर्यावासों में (इन-सीटू) संरक्षण-
- प्राकृतिक पर्यावासों में यथास्थान (इन-सीटू) संरक्षण का अर्थ है पौधों और जानवरों को उनकी उत्पत्ति के प्राकृतिक स्थलों पर सुरक्षित रखना।
- यह कार्य राष्ट्रीय उद्यानों, बायोस्फीयर रिजर्व और जीन अभयारण्यों के माध्यम से किया जाता है।
- वर्तमान में भारत में 108 एमपीसीए साइट हैं जो यथास्थान (इन-सीटू) संरक्षण तकनीकों का उपयोग करके जैविक और सांस्कृतिक विविधता के साथ-साथ स्वदेशी स्वास्थ्य परंपराओं को लागू करने के लिए उपयुक्त मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- प्राकृतिक पर्यावास से बाहर (एक्स-सीटू) संरक्षण-
- एक्स-सीटू संरक्षण का अर्थ है अपने प्राकृतिक आवासों के बाहर नियंत्रित परिस्थितियों में पौधों के आनुवंशिक संसाधनों की सुरक्षा करना ताकि दीर्घकालिक रूप से संरक्षण और जंगलों में संभावित रूप से उन्हें पुन: लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
- भारत में, इसके अंतर्गत राष्ट्रीय बीज जीन बैंक, राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर), नई दिल्ली में 9,361 औषधीय और सुगंधित पौधों (एमएपी) का संरक्षण शामिल है।
- इन एक्स-सीटू विधियों का उपयोग खराब बीजों की उत्पत्ति या वानस्पतिक प्रसार वाली प्रजातियों के लिए किया जाता है।
- वे भविष्य में उपयोग के लिए औषधीय पौधों की विविधता को सुरक्षित करने में मदद करते हैं।
लेखक- विवेक त्रिपाठी
संबंधित लिंक भी देखें…
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2235370®=3&lang=2
