प्रश्न – 19 जनवरी, 2026 को आईआईटी दिल्ली में स्थापित विद्युत क्षेत्र में विनियामक मामलों हेतु विशिष्टता केंद्र (Centre of Excellence – CoE) के संदर्भ में विकल्प में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) इस केंद्र की स्थापना आईआईटी दिल्ली, केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) और ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड (Grid India) के संयुक्त सहयोग से की गई है।
(b) इस केंद्र का उद्घाटन भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल द्वारा किया गया।
(c) यह केंद्र मुख्य रूप से केवल विद्युत उत्पादन (Generation) क्षेत्र से संबंधित तकनीकी अनुसंधान तक सीमित रहेगा।
(d) यह केंद्र नीति, विनियमन, ग्रिड संचालन, ऊर्जा संक्रमण, डी-कार्बनाइजेशन, डिजिटलीकरण, ऊर्जा भंडारण, मांग प्रत्युत्तर एवं ग्रीन हाइड्रोजन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर बहुविषयी अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 19 जनवरी, 2026 को भारत के विद्युत क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहल के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में विद्युत क्षेत्र में विनियामक मामलों हेतु विशिष्टता केंद्र (Centre of Excellence – CoE) का शुभारंभ किया गया।
- इस केंद्र का उद्घाटन भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल द्वारा किया गया।
- यह केंद्र आईआईटी दिल्ली, केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) तथा ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड (Grid India) के संयुक्त सहयोग से स्थापित किया गया है।
- इस विशिष्टता केंद्र को विनियामक अनुसंधान, क्षमता निर्माण, नीति-परामर्श और ज्ञान प्रसार के लिए एक राष्ट्रीय स्तर के संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- इस केंद्र की विशेषता यह है कि यह नीति, विनियमन, प्रणालीगत संचालन और अकादमिक अनुसंधान को एक ही संस्थागत ढांचे में एकीकृत करता है।
- सीईआरसी और ग्रिड इंडिया के साथ मिलकर यह केंद्र विद्युत क्षेत्र की प्रमुख विनियामक एवं संरचनात्मक चुनौतियों की पहचान करेगा, मानव संसाधन विकास और संस्थागत क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा तथा साक्ष्य-आधारित ज्ञान के प्रभावी प्रसार को सुनिश्चित करेगा।
- इसके साथ ही, यह केंद्र वैश्विक शैक्षणिक एवं नीति नेटवर्क से जुड़कर अत्याधुनिक अनुसंधान करेगा और विद्युत क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों को परामर्शात्मक सहयोग प्रदान करेगा।
- यह केंद्र विद्युत क्षेत्र की तीन प्रमुख चुनौतियों किफायती व्यवस्था, टिकाऊपन और दक्षता को संबोधित करते हुए नीतिगत और विनियामक निर्णयों में प्रत्यक्ष योगदान देगा।
- यह वितरण कंपनियों तथा विनियामक संस्थाओं की आंतरिक क्षमता को सुदृढ़ करेगा और नीति-निर्माताओं को ऐसे विश्लेषणात्मक उपकरण एवं प्रणालीगत मॉडल उपलब्ध कराएगा, जिनके माध्यम से वे उपभोक्ता कल्याण, प्रणाली की विश्वसनीयता और निवेश संकेतों के दृष्टिकोण से विभिन्न विनियामक प्रस्तावों का मूल्यांकन कर सकें।
- समग्र रूप से, यह विशिष्टता केंद्र विद्युत क्षेत्र के नियमन, मार्केट डिजाइन, ग्रिड संचालन, ऊर्जा संक्रमण, डी-कार्बनाइजेशन, डिजिटलीकरण, ऊर्जा भंडारण, मांग प्रत्युत्तर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर बहुविषयी अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
संबंधित लिंक भी देखें…
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2216120®=3&lang=2
