वित्तीय समावेशन सूचकांक-2025

प्रश्न – निम्न कथनों पर विचार कीजिए –

  1. जुलाई ,2025 में भारतीय रिजर्व बैंक ने मार्च 2025 को खत्म होने वाले वर्ष के लिए वित्तीय समावेशन सूचकांक (एफआई-इंडेक्स) जारी किया
  2. इसके अनुसार, मार्च 2025 के लिए वित्तीय समावेशन सूचकांक का मूल्य 67.0 है, जबकि मार्च 2024 में यह 64.2 था
    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा कथन सही है ?
    (a) केवल 1 (b) .केवल 2
    (c) 1 और 2 दोनों (d) इनमें से कोई नहीं
    उत्तर – (c)
    व्याख्यात्मक उत्तर
  • जुलाई ,2025 में भारतीय रिजर्व बैंक ने मार्च 2025 को खत्म होने वाले वर्ष के लिए वित्तीय समावेशन सूचकांक (एफआई-इंडेक्स) जारी किया है।
  • यह सूचकांक 97 संकेतकों पर आधारित है, जो वित्तीय समावेशन में प्रगति का आकलन करते हैं, जो मुख्य रूप से वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता, पहुंच में आसानी, इस्तेमाल, असमान वितरण और सेवाओं की कमी, वित्तीय साक्षरता और उपभोक्ता संरक्षण के प्रति संवेदनशील हैं।
  • सूचकांक 0 से 100 तक के पैमाने पर होता है, जहां 0 कोई वित्तीय समावेशन नहीं दर्शाता है, और 100 पूर्ण वित्तीय समावेशन को सूचित करता है।
  • सूचकांक में 3 उप-सूचकांक हैं, “पहुंच”, “उपयोग” और “गुणवत्ता”, प्रत्येक उप-सूचकांक का क्रमशः 35, 45 और 20 प्रतिशत हिस्सा है।
  • “पहुंच” उप-सूचकांक वित्तीय समावेशन के आपूर्ति पक्ष, जैसे भौतिक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, की उपलब्धता को प्रदर्शित करता है।
  • यह 26 संकेतकों का एक सूचकांक है, जिन्हें चार भागों, अर्थात् बैंकिंग, डिजिटल, पेंशन और बीमा89-96 में बांटा गया है।
  • “पहुंच” के पैमाने में सुधार बचत खातों, डाकघरों, म्यूचुअल फंड के ग्राहकों, जेएएम इकोसिस्टम, बीमा कार्यालयों की संख्या, प्रीपेड भुगतान उपकरण (पीपीआई) जारीकर्ताओं और पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनलों आदि की संख्या में बदलाव से संबंधित है।
  • उपयोग” एक उप-सूचकांक है जो वित्तीय समावेशन के मांग पक्ष को दर्शाता है और इसके पांच हिस्से हैं: बचत एवं निवेश, डिजिटल, पेंशन, बीमा और ऋण।
  • इसमें 52 संकेतक शामिल हैं जो बचत, निवेश, बीमा, क्रेडिट आदि के जरिए वित्तीय अवसंरचना के इस्तेमाल को प्रदर्शित करते हैं।
  • “उपयोग” उप-सूचकांक कुल क्रेडिट खातों की संख्या, क्रेडिट खातों में बकाया राशि, यूपीआई लेन-देन की मात्रा और मूल्य, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के आधार पर बदलता रहता है।
  • “गुणवत्ता” एक त्रि-आयामी, अर्थात वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता संरक्षण और असमानता, उप-सूचकांक है, जिसमें 19 संकेतक शामिल हैं।
  • यह सूचकांक नागरिकों को वित्तीय सेवाओं, उनके अधिकारों, उनके सुरक्षित उपयोग के तरीकों और प्रभावी शिकायत निपटान तंत्र के बारे में शिक्षित करने के लिए हितधारकों की ओर से किए गए प्रयासों को दर्शाता है।
  • इसके अनुसार , मार्च 2025 के लिए वित्तीय समावेशन सूचकांक का मूल्य 67.0 है, जबकि मार्च 2024 में यह 64.2 था।
  • इसके अतिरिक्त, 2021 से इसमें 24.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो देश के बढ़ते डिजिटल वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर में सभी नागरिकों को शामिल करने के सरकार के निरंतर समर्पण को प्रदर्शित करता है।
  • वित्तीय समावेशन को लोगों और कारोबार की जरूरतों को जिम्मेदारी और संपोषित तरीके से पूरा करने के लिए किफायती वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की उपलब्धता के तौर पर परिभाषित किया गया है।
  • यह उद्यमशीलता, व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहन देता है, महिलाओं को सशक्त बनाता है और जोखिमों के प्रबंधन में भी सहायता करता है जिससे आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलती है, उत्पादकता और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों द्वारा अपनाए गए सतत विकास के लक्ष्यों के लिए 2030 एजेंडा में वित्तीय समावेशन को 17 में से 7 लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक प्रमुख कारक बताया गया है।
  • विश्व बैंक ने भी वित्तीय समावेशन को विकास का एक महत्वपूर्ण अंग माना है और दुनिया भर में लोगों के वित्तीय सेवाओं के इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए ग्लोबल फिंडेक्स डेटाबेस प्रकाशित करता है।
  • ग्लोबल फिंडेक्स 2025 ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत में खाता स्वामित्व 2011 से अब तक 89 प्रतिशत तक पहुंच गया है और देश ने सक्रिय खातों वाले वयस्कों की हिस्सेदारी बढ़ाने में प्रगति की है।

लेखक- विवेक त्रिपाठी

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=154980&ModuleId=3#:~:text=The%20Reserve%20Bank%20of%20India,to%2064.2%20in%20March%202024.

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=154981&ModuleId=3