राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार (एनजीए)- 2024

प्रश्न – निम्न कथनों पर विचार कीजिए –

  1. 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार (एनजीए) -2024 प्रदान किया
  2. भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के वरिष्ठ वैज्ञानिक और आईआईएसईआर, पुणे के अतिथि प्राध्यापक (विजिटिंग प्रोफेसर) प्रोफेसर श्याम सुंदर राय को भूविज्ञान में उनके अनुकरणीय करियर और योगदानों के लिए आजीवन उपलब्धि के लिए राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार प्रदान किया गया
    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है ?
    (a) केवल 1 (b) केवल 2
    (c) 1 और 2 दोनों (d) इनमे से कोई नहीं
    उत्तर – (c)
    व्याख्यात्मक उत्तर
  • 26 सितंबर, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केन्द्र में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार (एनजीए) -2024 प्रदान किया
  • भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा वर्ष 1966 में स्थापित राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार (जिसे 2009 तक राष्ट्रीय खनिज पुरस्कार के रूप में जाना जाता था) भूविज्ञान के क्षेत्र में देश के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है।
  • इन पुरस्कारों का उद्देश्य खनिज की खोज एवं अन्वेषण, खनन प्रौद्योगिकी एवं खनिज संवर्धन, मौलिक/अनुप्रयुक्त भूविज्ञान जैसे भूविज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों और उत्कृष्ट योगदान के लिए व्यक्तियों और टीमों को सम्मानित करना है।
  • राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार 2024 (10 पुरस्कार)-
  • क्षेत्र (i): आर्थिक और/या सामरिक महत्व के खनिज की खोज एवं अन्वेषण (जीवाश्म ईंधन को छोड़कर) और नवीन तकनीकों का अनुप्रयोग। इस क्षेत्र में दिए जाने वाले दो पुरस्कारों में से कम से कम एक पुरस्कार महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दिया जाएगा। (2 पुरस्कार)
  1. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) टीम में शामिल हैं:
    i. श्री हरमन महंत, वरिष्ठ भूविज्ञानी,
    ii. श्री उत्पोल कुमार दास, वरिष्ठ भूविज्ञानी,
    iii. श्री श्याम कुमार संगमरेड्डी, वरिष्ठ भूविज्ञानी, और
    i v. श्री साई कुमार समाला, भूविज्ञानी
  2. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीम में शामिल हैं:
    i . श्री नवजीत सिंह नैयर, निदेशक,
    ii. श्री अमित कुमार, वरिष्ठ भूविज्ञानी,
    iii. सुश्री तृप्ति बाबा, वरिष्ठ भूविज्ञानी, और
    iv. डॉ. संदीप कुमार, भूविज्ञानी
  • क्षेत्र (ii): आर्थिक और/या सामरिक महत्व के कोयला, लिग्नाइट और कोल बेड मीथेन की खोज एवं अन्वेषण तथा नवीन तकनीकों का अनुप्रयोग तथा तेल, प्राकृतिक गैस, शेल गैस और गैस हाइड्रेट्स की खोज एवं अन्वेषण (संसाधनों के दोहन और जलाशय प्रबंधन हेतु परियोजना के विकास और नियोजन सहित)। (1 पुरस्कार)
  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीम में शामिल हैं:
    i. श्रीमती श्रद्धांजलि सुभदर्शिनी, अधीक्षण भूविज्ञानी,
    ii. श्री सुप्रिया चक्रवर्ती, वरिष्ठ भूविज्ञानी, और
    iii. श्री जयदीप मुखर्जी, निदेशक
  • क्षेत्र (iii): खनन प्रौद्योगिकी, जिसमें नई विधियों व प्रौद्योगिकियों का विकास एवं अनुप्रयोग, अनुसंधान और विकास शामिल है। खनिज संसाधनों का संरक्षण, व्यवस्थित खदान नियोजन, खदान की सुरक्षा, खदान की आग, खदान के खतरे, खदान का पुनर्रोद्धार एवं पुनर्वास। (1 पुरस्कार)
  • डॉ. जय कृष्ण पांडे
  • क्षेत्र (iv): खनिज संवर्धन (खनिज प्रसंस्करण, निम्न-श्रेणी के अयस्कों के उपयोग हेतु परियोजना का विकास एवं मूल्यवर्धित खनिज उत्पादों का उत्पादन एवं खनिज अर्थशास्त्र सहित) और सतत खनिज विकास (खदान की बंदी, परियोजना का विकास, संस्थागत विकास और क्षमता निर्माण सहित)। (1 पुरस्कार)
  • डॉ. रणजीत कुमार सिंह
  • क्षेत्र (v): मूल भूविज्ञान, जिसमें स्तर विज्ञान, संरचनात्मक भूविज्ञान, जीवाश्म विज्ञान, भूगतिकी, भूरसायन विज्ञान, भू-कालक्रम और समस्थानिक भूविज्ञान, महासागर विकास (समुद्र विज्ञान और समुद्री भूविज्ञान), हिमनद विज्ञान और आर्कटिक एवं भूवैज्ञानिक अभियान समेत अंटार्कटिक अनुसंधान है: और विज्ञान सर्वेक्षण/आधारभूत भूविज्ञान डेटा संग्रह जिसमें भूवैज्ञानिक और भू-रासायनिक मानचित्रण एवं सर्वेक्षण तथा व्यवस्थित विषयगत मानचित्रण शामिल हैं। (2 पुरस्कार)
    1. डॉ. वेदुला वेंकट सुब्रह्मण्य श्रीनिवास सरमा
  • मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान,
    क्षेत्रीय केन्द्र, विशाखापत्तनम
    1. डॉ. मेकला राम मोहन
  • मुख्य वैज्ञानिक-सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
  • क्षेत्र (vi): अनुप्रयुक्त भूविज्ञान: अभियांत्रिकी भूविज्ञान, भूतापीय ऊर्जा, भूकंप-विवर्तनिकी, भू-सांख्यिकी, सुदूर संवेदन एवं भू-सूचना प्रणाली (स्थानिक डेटा प्रबंधन अनुप्रयोग और डेटा एकीकरण सहित); भूजल अन्वेषण (परियोजना का विकास, जल-भूवैज्ञानिक अध्ययन और भूजल संसाधनों के प्रबंधन सहित); खनन, शहरी, औद्योगिक, तटीय और रेगिस्तानी प्रबंधन, पुराजलवायु, पुरापर्यावरण, चिकित्सा भूविज्ञान, जलवायु परिवर्तन और इकोसिस्टम पर उनके प्रभाव से संबंधित अध्ययन से संबंधित भू-पर्यावरण अध्ययन। (1 पुरस्कार)
  • प्रो. गुलाम जिलानी, प्रोफेसर, पृथ्वी विज्ञान विभाग और डीन, पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान संकाय, कश्मीर विश्वविद्यालय
  • क्षेत्र (vii): भूभौतिकी / अनुप्रयुक्त भूभौतिकी: भूभौतिकीय अन्वेषण में नवीन प्रौद्योगिकियां भूभौतिकीय विधियों का अनुप्रयोग, भू-चुंबकत्व, भूभौतिकीय सर्वेक्षण तकनीकें और उपकरण। (1 पुरस्कार)
  • प्रो. संजीत कुमार पाल
  • प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष-अनुप्रयुक्त भूभौतिकी विभाग, आईआईटी (आईएसएम), धनबाद
  • क्षेत्र (viii): प्राकृतिक आपदा अनुसंधान, जिसमें भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और सुनामी जैसे प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित वैज्ञानिक अध्ययन शामिल हैं। (1 पुरस्कार)
  • प्रो. मुकट लाल शर्मा
  • प्रोफेसर, भूकंप इंजीनियरिंग और प्रमुख, अंतरराष्ट्रीय बांध उत्कृष्टता केन्द्र, आईआईटी-रुड़की

लेखक- विवेक त्रिपाठी

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2171117

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2171598

https://www.newsonair.gov.in/president-droupadi-murmu-confers-national-geoscience-awards-2024

https://www.newindianexpress.com/nation/2025/Sep/26/president-presents-national-geoscience-awards-2024-calls-for-sustainable-mining-rare-earth-self-reliance