मैग्नेटोरियोलॉजिकल (Magnetorheological-MR) द्रव

मैग्नेटोरियोलॉजिकल (Magnetorheological-MR) द्रव

प्रश्न – निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –

  1. जुलाई – अगस्त, 2026 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पटना के शोधकर्ताओं ने हाइब्रिड मैग्नेटो-रियामीटर (Hybrid Magneto-Rheometer) नामक एक उन्नत उपकरण विकसित किया है।
  2. मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव एक विशेष प्रकार का द्रव है, जिसकी विशेषता यह है कि यह चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में अपनी यांत्रिक और प्रवाह संबंधी विशेषताओं को तत्काल परिवर्तित कर सकता है।
    उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
    (a) 1 और 2 दोनों (b) केवल 1
    (c) केवल 2 (d) इनमें से कोई नहीं
    उत्तर – (b)

व्याख्यात्मक उत्तर

  • जुलाई – अगस्त, 2026 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पटना के शोधकर्ताओं ने हाइब्रिड मैग्नेटो-रियामीटर (Hybrid Magneto-Rheometer) नामक एक उन्नत उपकरण विकसित किया है।
  • यह उपकरण मैग्नेटोरियोलॉजिकल (MR) द्रवों के व्यवहार का अधिक सटीक अध्ययन करने में सहायता करेगा।
  • यह चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रवों के प्रवाह और यांत्रिक गुणों का विश्लेषण कर सकता है।
  • इससे मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रवों की कार्यक्षमता और विभिन्न परिस्थितियों में उनके व्यवहार को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
  • इसका प्रयोग औद्योगिक, ऑटोमोबाइल और वैज्ञानिक क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
  • यह नवाचार मैग्नेटोरियोलॉजिकल आधारित उन्नत तकनीकों और उपकरणों के विकास को बढ़ावा देगा।
  • क्या आप जाने है
  • मैग्नेटोरियोलॉजिकल (MR) द्रव एक ऐसा तरल पदार्थ है जिसमें अच्छे चुंबकीय गुण होते हैं।
  • मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव एक विशेष प्रकार का द्रव है, जिसकी विशेषता यह है कि यह चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में अपनी यांत्रिक और प्रवाह संबंधी विशेषताओं को तत्काल परिवर्तित कर सकता है।
  • सामान्य स्थिति में यह एक साधारण द्रव की तरह व्यवहार करता है, लेकिन जैसे ही इस पर चुंबकीय क्षेत्र लगाया जाता है, इसकी श्यानता तेजी से बढ़ जाती है और यह ठोस-जैसी अवस्था ग्रहण कर लेता है।
  • मैग्नेटोरियोलॉजिकल MR द्रव में सूक्ष्म चुंबकीय लोहे के कण, गैर-चुंबकीय वाहक द्रव तथा कणों के जमाव को रोकने वाले योजक मिलाए जाते हैं।
  • इसके निर्माण में खनिज तेल, सिलिकॉन तेल, अरंडी तेल, सोयाबीन तेल, केरोसिन, कृत्रिम तेल और जल-आधारित द्रवों का उपयोग किया जा सकता है।
  • विद्युतचुंबक की सहायता से मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव द्वारा उत्पन्न बल को आवश्यकतानुसार नियंत्रित किया जा सकता है।
  • इसका प्रयोग ब्रेक, क्लच, शॉक एब्जॉर्बर और डैम्पर जैसी प्रणालियों में किया जाता है।
  • मैग्नेटोरियोलॉजिकल द्रव कंपन नियंत्रण उपकरणों, एक्चुएटर और उन्नत चिकित्सा उपकरणों के लिए भी उपयोगी है।

लेखक- नवनीत सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2293854&reg=3&lang=1