प्रश्न – 27 जनवरी, 2026 को भारत–यूरोपीय संघ (EU) के बीच अंतिम रूप दिए गए व्यापक व्यापार एवं निवेश समझौते (BTIA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। इनमें से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) इस समझौते के अंतर्गत यूरोपीय संघ भारत के लगभग 99.5% निर्यात पर शुल्क समाप्त करेगा।
(b) भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी, सोया मील और अनाज जैसे क्षेत्रों को भारत ने समझौते से बाहर रखा है।
(c) यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क को तुरंत 110% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा और किसी प्रकार की वार्षिक सीमा लागू नहीं होगी।
(d) सेवा क्षेत्र में भारत ने 102 और यूरोपीय संघ ने 144 सेवा क्षेत्रों में पारस्परिक बाजार पहुँच प्रदान की है।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 27 जनवरी, 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया, जिसे तकनीकी रूप से व्यापक व्यापार एवं निवेश समझौता (Broad-based Trade and Investment Agreement – BTIA) कहा जाता है।
- यह समझौता दोनों पक्षों की संसदों से अनुमोदन के बाद प्रभावी होगा और इसे भारत–ईयू आर्थिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
- इस महत्त्वपूर्ण समझौते की घोषणा भारत यात्रा पर आए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त रूप से की।
- उल्लेखनीय है कि एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2026) समारोह के मुख्य अतिथि भी थे, जिससे इस समझौते का कूटनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
- यह समझौता भारत और ईयू दोनों के लिए अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक व्यापार सौदा है।
- उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे उचित ही “Mother of All Deals” कहा है, क्योंकि यह समझौता वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 25% और वैश्विक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है।
- इससे भारत–ईयू संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी तक सीमित न रहकर एक गहरे आर्थिक गठबंधन के रूप में उभरते हैं।
- इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत के 99.5% निर्यात पर शुल्क समाप्त करेगा, जबकि भारत ईयू के 96.6% उत्पादों पर टैरिफ कम या समाप्त करेगा। – यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क को चरणबद्ध रूप से 110% से घटाकर 10–40% किया जाएगा, हालांकि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की सुरक्षा के लिए प्रति वर्ष केवल 50,000 लग्ज़री कारों को ही इस रियायत का लाभ मिलेगा।
- इसी प्रकार, 750 मिलीलीटर से अधिक की महंगी शराब पर शुल्क 150% से घटाकर पहले 50% और फिर 20% तक लाया जाएगा, जबकि सस्ती शराब पर उच्च शुल्क बना रहेगा।
- खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं में पास्ता, चॉकलेट और ऑलिव ऑयल जैसे उत्पादों पर शुल्क शून्य किया जाएगा, वहीं भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फर्नीचर, खेल सामान और रत्न-आभूषण को यूरोपीय बाजार में जीरो ड्यूटी एंट्री मिलेगी।
- सेवा क्षेत्र में भारत ने 102 और ईयू ने 144 सेवा क्षेत्रों जैसे IT, शिक्षा, वित्त और पर्यटन में पारस्परिक बाजार पहुँच प्रदान की है।
- किसानों के हितों की रक्षा के लिए भारत ने डेयरी, सोया मील और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है।
- वहीं, यूरोपीय संघ ने भी अपने बीफ, पोल्ट्री और चीनी क्षेत्रों को उदार बनाने से इनकार किया है। निवेश के क्षेत्र में यूरोपीय कंपनियों को भारत के बैंकिंग, बीमा और लीगल सर्विसेज में कुछ शर्तों के साथ कार्य करने की अनुमति दी गई है।
- किसी भी निवेश विवाद की स्थिति में निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के माध्यम से समाधान का प्रावधान किया गया है।
- इस समझौते से भारत को बहुआयामी लाभ मिलने की उम्मीद है। कपड़ा, चमड़ा और रत्न-आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी, जिससे लाखों नए रोजगार सृजित हो सकते हैं।
- साथ ही, भारतीय IT पेशेवरों, डॉक्टरों और छात्रों के लिए यूरोप में काम करने, वीज़ा प्राप्त करने और पोस्ट-स्टडी वर्क के अवसर पहले की तुलना में अधिक सुगम होंगे।
- व्यापक स्तर पर यह समझौता भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
संबंधित लिंक भी देखें…
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219288®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219065®=3&lang=1
