प्रश्न – रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रस्तावित एकीकृत भूमिगत कोयला गैसीकरण परिसर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(a) यह परिसर आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में चिंतलपुडी सेक्टर-A1 और रेचर्ला कोयला ब्लॉकों में विकसित किया जाना प्रस्तावित है।
(b) परियोजना के 30 वर्षीय जीवनकाल में लगभग 2.73 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
(c) भूमिगत कोयला गैसीकरण में कोयले को खदान से बाहर निकालकर संयंत्र में संश्लेषण गैस में बदला जाता है।
(d) उत्पादित संश्लेषण गैस का उपयोग यूरिया, अमोनिया, मेथनॉल और कृत्रिम ईंधन के निर्माण में किया जा सकता है।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- अगस्त 2026 में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में भारत का पहला एकीकृत भूमिगत कोयला गैसीकरण परिसर विकसित करने के लिए लगभग 2.73 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा।
- यह निवेश परियोजना के 30 वर्षीय जीवनकाल में चरणबद्ध रुप से किया जाना प्रस्तावित है।
- हालांकि, इसका कार्यान्वयन अन्वेषण की सफलता और परियोजना की व्यावसायिक व्यवहार्यता पर निर्भर करेगा।
- इस परिसर का विकास चिंतलपुडी सेक्टर-A1 और रेचर्ला कोयला ब्लॉकों में किया जाएगा।
- अप्रैल 2026 में कोयला मंत्रालय ने 14वें वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी दौर के अंतर्गत इन दोनों ब्लॉकों के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ समझौते किए थे।
- प्रस्ताव के अनुसार, अन्वेषण एवं पायलट चरण में 3,000 करोड़ रुपये, विकास चरण में 1.20 लाख करोड़ रुपये तथा उत्पादन चरण में 1.50 लाख करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे।
- भूमिगत कोयला गैसीकरण ऐसी तकनीक है, जिसमें गहराई में स्थित कोयले को बाहर निकाले बिना भूमिगत अवस्था में ही संश्लेषण गैस में परिवर्तित किया जाता है।
- इस गैस का उपयोग यूरिया, अमोनिया, मेथनॉल, डाइमिथाइल ईथर और कृत्रिम ईंधन के निर्माण में किया जा सकता है।
- उल्लेखनीय है कि 2.73 लाख करोड़ रुपये की राशि अभी कंपनी का प्रारंभिक निवेश प्रस्ताव है, न कि अंतिम रूप से स्वीकृत निवेश।
- यह पहल वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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