भारत की पहली भूतापीय ऊर्जा परियोजना

प्रश्न – निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
कथन-I: पुगा घाटी परियोजना लद्दाख जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा की संभावनाओं को बढ़ा सकती है।
कथन-II: भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के आंतरिक ताप से प्राप्त होती है, और यह मौसम पर अपेक्षाकृत कम निर्भर होती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए—
(a) कथन-Iऔर कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-Iकी सही व्याख्या करता है।
(b) कथन-Iऔर कथन-II दोनों सही हैं, लेकिन कथन-II, कथन-Iकी सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) कथन-Iसही है, लेकिन कथन-II गलत है।
(d) कथन-Iगलत है, लेकिन कथन-II सही है।
उत्तर – (a)


व्याख्यात्मक उत्तर

  • 23 मई, 2026 लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने भारत सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के साथ समझौता – ज्ञापन (एमओयू) को 5 वर्षों के लिए बढ़ाने की मंजूरी प्रदान की।
  • यह समझौता लद्दाख की पुगा घाटी में 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर भारत की पहली भूतापीय ऊर्जा परियोजना स्थापित करने के लिए किया गया है।
  • इससे पहले, 6 फरवरी, 2021 को ओएनजीसी के साथ हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन 5 फरवरी, 2026 को समाप्त हो गया था।
  • तब से, ओएनजीसी खराब मौसम की स्थिति के कारण बहुत सारा काम अधूरा रह जाने के कारण समझौता -ज्ञापन के विस्तार का अनुरोध कर रहा था।
  • इस समझौता – ज्ञापन के अनुसार, ओएनजीसी पुगा घाटी में 1 मेगावाट क्षमता का एक पायलट भूतापीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करेगा और साथ ही लद्दाख में भूतापीय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक दोहन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगा।
  • समझौते के अनुसार, ओएनजीसी एनर्जी सेंटर 2026 के कार्य सत्र के दौरान ही मौजूदा भूतापीय कुएं को 1000 मीटर तक गहरा करेगा और परियोजना के अगले चरण में 1000 मीटर की गहराई का एक और भूतापीय कुआं खोदेगा।
  • पायलट भूतापीय ऊर्जा संयंत्र का परीक्षण, मूल्यांकन और चालू होना वित्त वर्ष 2026-27 में होने की उम्मीद है।
  • इसके बाद, परियोजना के दूसरे चरण के तहत, चुमाथांग क्षेत्र में सर्वेक्षण और भूतापीय जांच की जाएगी, जिसके बाद ड्रिलिंग गतिविधियां शुरू होंगी और लद्दाख में व्यावसायिक स्तर पर भूतापीय विकास के लिए डीपीआर (विस्तृत रिपोर्ट) तैयार की जाएगी।
  • बेहद चुनौतीपूर्ण भूभाग, खराब मौसम की स्थिति और तकनीकी जटिलताओं के बावजूद, ओएनजीसी ने वर्ष 2025 में 405 मीटर की गहराई तक पहला भूतापीय कुआँ सफलतापूर्वक खोदा, जिससे यह लद्दाख में अब तक खोदा गया सबसे गहरा भूतापीय कुआँ बन गया।
  • भूतापमापी अध्ययन और भूतापीय नमूनों के विश्लेषण से पता चला है कि सतह के नीचे का तापमान 240 डिग्री सेल्सियस से अधिक है, जो भूतापीय ऊर्जा उत्पादन के लिए पर्याप्त माना जाता है।
  • प्रस्तावित पायलट पावर प्लांट लगभग 200 डिग्री सेल्सियस के टरबाइन इनलेट तापमान पर संचालित होने की उम्मीद है, जिसकी लक्षित उत्पादन क्षमता 1 मेगावाट है।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://lokniwas.ladakh.gov.in/press-details/270

https://www.aninews.in/news/national/general-news/ladakh-l-g-approves-extension-of-mou-with-ongc-for-indias-first-geothermal-energy-project20260523142502

https://energy.economictimes.indiatimes.com/news/oil-and-gas/ladakh-extends-mou-with-ongc-for-groundbreaking-geothermal-energy-project/131277143

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