प्रश्न – हाल ही में भारत की पहली ओपन-सी (खुले समुद्र में) समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया गया। इस परियोजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –
1. इस परियोजना का शुभारंभ अंडमान सागर से किया गया।
2. इस परियोजना को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
3. राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) इस परियोजना की तकनीकी सहयोगी संस्था है।
4. यह परियोजना लक्षद्वीप प्रशासन के सहयोग से लागू की जा रही है।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) 1, 2 और 3 (b) 1 और 3
(c) 2 और 4 (d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर – (a)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 18 जनवरी, 2026 को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंडमान सागर से भारत की पहली ओपन-सी (खुले समुद्र में) समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया।
- यह परियोजना पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), उसकी तकनीकी संस्था राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) और अंडमान-निकोबार केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के सहयोग से लागू की जा रही है।
- इसका उद्देश्य खुले समुद्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में समुद्री मछलियों (फिनफिश) और समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती को बढ़ावा देना है, ताकि वैज्ञानिक तकनीक के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका भी मजबूत हो।
- इस अवसर पर दो मुख्य पहलें शुरू की गईं—पहली, मछुआरा समुदायों को सीवीड के बीज दिए गए ताकि वे खुले समुद्र में गहरे पानी में शैवाल की खेती कर सकें।
- दूसरी, फिनफिश के बीज दिए गए और एनआईओटी द्वारा विकसित विशेष ओपन-सी केज (पिंजरा) तकनीक के जरिए मछली पालन की शुरुआत कराई गई।
- अपने दौरे में मंत्री ने वांडूर के पास स्थित महत्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क (MGMNP) का भी भ्रमण किया, जो वर्ष 1983 में स्थापित हुआ था और 15 द्वीपों में फैला है।
- यह पार्क कोरल रीफ, मैंग्रोव, कछुए और विविध समुद्री जीव-जंतुओं के लिए प्रसिद्ध है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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