भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक को इक्विटी सहायता प्रदान करने की मंजूरी

प्रश्न – 21 जनवरी, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सिडबी (SIDBI) को दी गई 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी सहायता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –

  1. यह निवेश वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के माध्यम से किया जाएगा।
  2. यह निवेश तीन चरणों में किया जाएगा।
  3. संपूर्ण राशि वित्त वर्ष 2025–26 में ही निवेश की जाएगी।
    उपयुक्त सही विकल्प चुनिए –
    (a) केवल 1 और 2
    (b) केवल 2 और 3
    (c) केवल 1 और 3
    (d) 1, 2 और 3
    उत्तर – (a)
    व्याख्यात्मक उत्तर
  • 21 जनवरी, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी सहायता प्रदान करने को मंजूरी प्रदान की।
  • सरकार द्वारा यह इक्विटी पूंजी वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के माध्यम से तीन चरणों में सिडबी में निवेश की जाएगी।
  • वित्त वर्ष 2025–26 में 3,000 करोड़ रुपये की राशि 568.65 रुपये प्रति शेयर की बुक वैल्यू (31 मार्च 2025 की स्थिति के अनुसार) पर निवेश की जाएगी।
  • इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026–27 और 2027–28 में क्रमशः 1,000 करोड़ रुपये, 1,000 करोड़ रुपये की राशि संबंधित पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की 31 मार्च की बुक वैल्यू पर निवेश की जाएगी।
  • इस पूंजी निवेश के बाद सिडबी द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले एमएसएमई की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
  • वित्त वर्ष 2024-2025 के अंत तक यह संख्या 76.26 लाख थी, जो वित्त वर्ष 2028 के अंत तक बढ़कर लगभग 102 लाख हो जाएगी।
  • इस प्रकार लगभग 25.74 लाख नए एमएसएमईको औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा।
  • एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार, 30 सितंबर 2025 तक देश में 6.90 करोड़ एमएसएमई द्वारा लगभग 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जिससे प्रति एमएसएमई औसतन 4.37 व्यक्तियों को रोजगार मिलता है।
  • इसी औसत के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि सिडबी द्वारा नए जोड़े गए 25.74 लाख एमएसएमई के माध्यम से लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजित हो सकते हैं।
  • वास्तव में, सिडबी के निर्देशित ऋण पोर्टफोलियो, डिजिटल एवं डिजिटल-सक्षम कोलैटरल-फ्री ऋण उत्पादों तथा स्टार्ट-अप्स को दी जा रही वेंचर डेट के कारण उसके जोखिम-भारित परिसंपत्तियों में आगामी वर्षों में तीव्र वृद्धि की संभावना है।
  • ऐसी स्थिति में बैंक के लिए पर्याप्त पूंजी बनाए रखना आवश्यक हो जाता है ताकि उसका पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) सुरक्षित स्तर पर बना रहे।
  • सरकार द्वारा प्रस्तावित यह इक्विटी निवेश सिडबी को उच्च तनाव की स्थिति में भी 10.50% से अधिक सीआरएआर तथा Pillar-1 और Pillar-2 के अंतर्गत 14.50% से अधिक सीआरएआर बनाए रखने में सक्षम बनाएगा।
  • एक स्वस्थ सीआरएआर न केवल बैंक की क्रेडिट रेटिंग की रक्षा करता है, बल्कि उसे बाजार से उचित ब्याज दरों पर संसाधन जुटाने में भी सहायता करता है।
  • परिणामस्वरूप, एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी लागत पर ऋण उपलब्ध हो सकेगा।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.pmindia.gov.in/en/news_updates/cabinet-approves-equity-support-to-small-industries-development-bank-of-india