प्रश्न – जनवरी, 2026 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) के बीच हुए समझौते (MoU) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –
(a) यह समझौता मुख्य रूप से शहरी मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए किया गया है।
(b) यह समझौता एक “अम्ब्रेला फ्रेमवर्क” के रूप में कार्य करेगा।
(c) इस समझौते के अंतर्गत रेल–सड़क संयुक्त पुल, सुरंगें और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क शामिल हैं।
(d) समझौते के क्रियान्वयन हेतु संयुक्त कार्य समूह (JWG) का गठन किया जाएगा।
उपर्युक्त में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) केवल a
(b) केवल b
(c) केवल c
(d) केवल d
उत्तर – (a)
व्याख्यात्मक उत्तर
- जनवरी, 2026 में एकीकृत अवसंरचना विकास को मज़बूत करने हेतुभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और रेल मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- यह समझौता नई दिल्ली स्थित एनएचएआई मुख्यालय में एनएचएआई अध्यक्ष संतोष कुमार यादव की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
- यह समझौता रिसोर्स ऑप्टिमाइज़ेशन और आपसी लाभ के अवसरों की तलाश के लिए सहयोग का बड़ा फ्रेमवर्क बनाने के लिए किया गया है।
- यह समझौता एक “अम्ब्रेला फ्रेमवर्क” की तरह कार्य करेगा, जिसके अंतर्गत दोनों संस्थाएँ परस्पर रुचि वाले क्षेत्रों की पहचान कर योजना, समन्वय और क्रियान्वयन करेंगी।
- खासकर जटिल और चुनौतीपूर्ण भू-भागों में, जहाँ सड़क और रेल परियोजनाओं का समेकित समाधान दक्षता, सुरक्षा और आर्थिक मूल्य तीनों बढ़ा सकता है, वहाँ यह साझेदारी अधिक प्रभावी साबित होगी।
- सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में रेल–सड़क संयुक्त पुल (Rail-cum-Road Bridges), सुरंगें, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, इंटर-मॉडल हब तथा ग्रेड सेपरेटर शामिल हैं—विशेषकर उन स्थानों पर जहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग रेलवे लाइनों को काटते हैं या साथ-साथ चलते हैं।
- साथ ही, जहाँ संभव होगा, कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना भी MoU में की गई है।
- यह सहयोग एनएचएआई को मुश्किल भू-भागों में परियोजनाओं को पूरा करने में केआरसीएल के बड़े अनुभव का फायदा उठाने में भी मदद करेगा, जिसमें जटिल पुल और सुरंग परियोजनाएं और ढलान स्थिरीकरण में डिज़ाइन, ड्राइंग और सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा/प्रूफ चेक के लिए विशेष सहायता शामिल है।
- समझौते में मौजूदा सुरंगों और ढलान सुरक्षा कार्यों का सुरक्षा और गुणवत्ता ऑडिट प्रदान करना, साथ ही केआरसीएल के प्रशिक्षण संस्थान में एनएचएआई अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना भी शामिल है।
- इसके अलावा, समझौते में परियोजना प्रबंधन, इंजीनियरिंग डिज़ाइन, निर्माण पद्धतियों, भूवैज्ञानिक चुनौतियों का समाधान तथा पर्यावरण प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं सहित तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने का प्रावधान है।
- समझौते के अंतर्गत नवीन निर्माण सामग्री और तकनीकों पर सहयोगी अनुसंधान और विकास, (R&D) तथा परियोजना-विशिष्ट परामर्श सेवाएं प्रदान करने का प्रावधान भी परिकल्पित है।
- तकनीकी स्तर पर यह सहयोग परियोजना मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग डिज़ाइन, निर्माण पद्धतियों, भू-वैज्ञानिक चुनौतियों के समाधान और पर्यावरण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।
- साथ ही, नवीन निर्माण सामग्री व तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा आवश्यकतानुसार परियोजना-विशिष्ट परामर्श सेवाएँ भी इस समझौते का हिस्सा हैं।
- लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के मोर्चे पर दोनों संस्थाएँ अधिशेष/अल्प-उपयोग भूमि की संयुक्त पहचान कर उसे वाणिज्यिक विकास, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं के लिए उपयोग करने की संभावनाएँ तलाशेंगी।
- इसके साथ ही, फर्स्ट-माइल और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को प्रभावी बनाकर माल और यात्री परिवहन की समग्र दक्षता बढ़ाने, तथा आवश्यकता होने पर समर्पित माल गलियारे/लिंकेज जैसी योजनाओं पर भी काम किया जाएगा।
- प्रभावी कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए, दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलकर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) का गठन किया जाएगा।
- जेडब्ल्यूजी, सहयोग के लिए विशिष्ट परियोजनाओं की पहचान करने, प्रारंभिक मूल्यांकन और व्यवहार्यता अध्ययन करने, विस्तृत परियोजना प्रस्ताव विकसित करने, प्रगति की निगरानी करने और परिचालन मुद्दों को हल करने के लिए जिम्मेदार होगा।
- यह समझौता प्रारंभ में पांच वर्ष की अवधि के लिए वैध रहेगा।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
संबंधित लिंक भी देखें…
