प्रश्न – भारतीय नौसेना को सौंपे गए पनडुब्बी-रोधी युद्धक उथले जलयान ‘मांगरोल’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(a) यह कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आठ एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी में तीसरा पोत है।
(b) इसका निर्माण डेट नोर्स्के वेरिटास (DNV) के वर्गीकरण नियमों के अनुरूप किया गया है।
(c) यह हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट और उन्नत उथले जल सोनार से सुसज्जित है।
(d) यह गैस टर्बाइन प्रणोदन प्रणाली से संचालित है और इसमें पूर्णतः आयातित उपकरण लगाए गए हैं।
उत्तर – (d)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 21 अगस्त, 2026 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), कोच्चि ने भारतीय नौसेना को ‘मांगरोल’ (Mangrol) सौंपा।
- यह सीएसएल द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित किए जा रहे आठ पनडुब्बी-रोधी युद्धक उथले जलयानों (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) में तीसरा पोत है।
- इस युद्धपोत का निर्माण अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण संस्था ‘डेट नोर्स्के वेरिटास’(DNV) के नियमों के अनुरूप किया गया है।
- ‘मांगरोल’ विशेष रूप से तटीय एवं उथले समुद्री क्षेत्रों में पानी के भीतर निगरानी तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
- यह खोज एवं बचाव अभियान, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (LIMO) और बारूदी सुरंग बिछाने जैसे कार्य भी कर सकता है।
- डीजल इंजन–वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली से संचालित यह पोत हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट और उन्नत उथले जल के सोनार से सुसज्जित है।
- ये प्रणालियाँ इसे पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम बनाती हैं।
- इस पोत में लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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