ब्रेकथ्रू साइंस अवार्ड – 2025

प्रश्न – निम्न कथनों पर विचार कीजिए –
1.मई ,2025 में भारत ने मौलिक भौतिकी में लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर प्रयोगों के लिए मिले ब्रेकथ्रू साइंस अवार्ड – 2025 का जश्न मनाया
2. यह अवार्ड वर्ष 2015 से 15 जुलाई, 2024 के बीच एटीएलएएस, सीएमएस, एएलआईसीई और एलएचसीबी प्रयोगात्मक सहयोग से जारी किए गए सीईआरएन के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर रन-2 डेटा पर आधारित प्रकाशनों के सह-लेखकों को दिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा कथन सही है ?
(a) केवल (1) (b) केवल (2)
(c) (1) एवं (2) दोनों (d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (c)


व्याख्यात्मक उत्तर

  • मई ,2025 में भारत ने मौलिक भौतिकी में लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर प्रयोगों के लिए मिले ब्रेकथ्रू साइंस अवार्ड – 2025 का जश्न मनाया
  • यह अवार्ड वर्ष 2015 से 15 जुलाई, 2024 के बीच एटीएलएएस, सीएमएस, एएलआईसीई और एलएचसीबी प्रयोगात्मक सहयोग से जारी किए गए सीईआरएन के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर रन-2 डेटा पर आधारित प्रकाशनों के सह-लेखकों को दिया जाता है।
  • सीईआरएन (CERN) में इन चार प्रयोगों के लिए 3 मिलियन डॉलर का पुरस्कार प्रदान किया गया है और इसका उपयोग इनके द्वारा सदस्य संस्थानों के डॉक्टरेट छात्रों को सीईआरएन में अनुसंधान के दौरान अनुदान देने के लिए किया जाएगा।
  • इससे छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में काम करने का अनुभव और अपने देश तथा क्षेत्रों में वापस लाने के लिए नई विशेषज्ञता मिलेगी।
  • एलटीएलएएस में 5,345 अनुसंधानकर्ता शामिल थे, जबकि सीएमएस में 4,550, एएलआईसीई में 1,869 और एलएचसीबी में 1,744 अनुसंधानकर्ता शामिल थे।
  • भारतीय वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं ने एलिस (ए लार्ज आयन कोलाइडर एक्सपेरीमेंट) और सीएमएस (कॉम्पैक्ट म्यूऑन सोलेनॉइड) प्रयोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • कई भारतीय संस्थानों, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों ने प्रयोग की सफलता में बौद्धिक और तकनीकी दोनों तरह से योगदान दिया है।
  • डिटेक्टर विकास से लेकर डेटा विश्लेषण तक, भारतीय अनुसंधानकर्ताओं की विभिन्न टीमें प्रयोगों के हर चरण में, उनकी शुरुआत से ही सक्रिय रूप से शामिल रही हैं।
  • ये योगदान वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग के लिए भारत की प्रतिबद्धता और एलएचसी प्रयोगों की सफलता में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं।
  • यह प्रतिष्ठित पुरस्कार अनुसंधान को लेकर सहयोगात्मक और परिवर्तनकारी प्रयासों को सम्मानित करता है, जिसने हिग्स बोसोन, क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज्मा, पदार्थ-प्रतिपदार्थ विषमता और मानक मॉडल से परे भौतिकी के बारे में हमारी समझ को गहरा किया है।
  • एलएचसी के बारे में-
  • सर्न द्वारा संचालित, लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर विश्व का सबसे शक्तिशाली कण त्वरक है, जो उच्च-ऊर्जा प्रोटॉन और भारी-आयन टकरावों के माध्यम से सबसे छोटे पैमाने पर पदार्थ की संरचना का पता लगाने में सक्षम है।
  • सीईआरएन के साथ भारत की भागीदारी 1960 के दशक से चली आ रही है, जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) के वैज्ञानिकों ने सीईआरएन प्रोटॉन सिंक्रोट्रॉन का उपयोग करके पायन, काऑन और प्रोटॉन बीम के लिए इमल्शन स्टैक को एक्सपोज करने के लिए सीईआरएन का दौरा किया था।
  • बाद में, 1980 के दशक के दौरान एल3 के लिए हार्डवेयर और कोर-सॉफ्टवेयर में योगदान दिया गया – लार्ज इलेक्ट्रॉन पॉजिट्रॉन कोलाइडर (एलईपी) में चार बड़े प्रयोगों में से एक और जैड-लाइन आकार (न्यूट्रॉन से संबंधित, नाभिक में प्रोटॉन रेशियो) और नए कण खोजों के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • 1990 के दशक में, सहयोग भारी आयन भौतिकी में विस्तारित हुआ, जिसमें भारतीय समूहों ने एक सिंटिलेटर-पैड-आधारित फोटॉन मल्टीप्लिसिटी डिटेक्टर का योगदान दिया।
  • भारतीय टीमों ने सीईआरएन -एसपीएस में डब्‍ल्‍यूए93 और डब्‍ल्‍यूए98 प्रयोगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, सामूहिक प्रवाह के शुरुआती माप को प्राप्त किया और अव्यवस्थित किरल कंडेनसेट की खोज की।
  • वर्ष 1991 में, भारत (डीएई) ने सीईआरएन के अनुसंधान परियोजनाओं में वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के विकास के लिए सीईआरएन के साथ एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए
  • जिसके साथ वर्ष 1991 में एक औपचारिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
  • वर्ष 2009 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) द्वारा इसे और मजबूत किया गया, जिसने त्वरक प्रौद्योगिकी, डिटेक्टर आरएंडडी, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन प्रशिक्षण में विस्तारित सहयोग के लिए आधार तैयार किया।
  • यह समझौता सीईआरएन की दीर्घकालिक परियोजनाओं में संयुक्त अनुसंधान और अधिक भारतीय भागीदारी की सुविधा भी देता है।
  • एलएचसी परियोजना में महत्वपूर्ण भारतीय योगदान को मान्यता देते हुए, भारत को 2002 में “पर्यवेक्षक” का दर्जा दिया गया और अंततः भारत 2017 में सर्न का एक सहयोगी सदस्य देश बन गया।
  • भारत और सर्न के बीच दीर्घकालिक वैज्ञानिक सहयोग के प्रमाण के रूप में, जून 2004 में, भारत ने सर्न को नृत्य के देवता, भारतीय देवता शिव नटराज की 2 मीटर ऊंची प्रतिमा भेंट की।

लेखक- विवेक त्रिपाठी

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2131339#:~:text=The%202025%20Breakthrough%20Prize%20in,%2C%20CMS%2C%20ALICE%20and%20LHCb.