प्रश्न – 8 अगस्त 2025 को उच्चतम न्यायालय द्वारा बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के संबंध में दिए गए निर्णय के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) सर्वोच्च न्यायालय ने अध्यादेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जब तक उच्च न्यायालय इसकी वैधता पर निर्णय नहीं देता।
(b) अध्यादेश मंदिर का प्रशासनिक नियंत्रण राज्य सरकार के पास रखता है।
(c) सर्वोच्च न्यायालय ने खुद अध्यादेश की वैधता पर अंतिम निर्णय दिया और उसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।
(d) 14 सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का नेतृत्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार कर रहे हैं।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 8 अगस्त, 2025 को उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार के बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश के क्रियान्वयन पर तब तक रोक लगा दी है, जब तक उच्च न्यायालय इसकी वैधता पर निर्णय नहीं कर देता।
- यह अध्यादेश मंदिर का प्रशासनिक नियंत्रण राज्य सरकार के पास रखता है।
- न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 को दी गई चुनौतियों पर विचार करने से इनकार कर दिया, और कहा कि प्रभावित पक्ष उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
- अध्यादेश की धारा 3 में परिभाषित श्री बांके बिहार जी मंदिर ट्रस्ट का गठन और धारा 5 में निहित इसकी संरचना को तब तक स्थगित रखा जाएगा जब तक कि अध्यादेश (या राज्य विधानमंडल द्वारा बाद में पारित किसी भी अधिनियम) की वैधता का प्रश्न, उच्च न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से हल नहीं हो जाता।
- उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार के नेतृत्व में 14 सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया है।
- यह उच्चाधिकार प्राप्त मंदिर प्रबंधन समिति वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के अंदर और बाहर दैनिक कामकाज की देखरेख करेगी, जब तक कि उच्च न्यायालय मंदिर प्रबंधन को एक ट्रस्ट के अधीन लाने वाले उत्तर प्रदेश अध्यादेश की संवैधानिक वैधता पर कोई निर्णय नहीं ले लेता।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
संबंधित लिंक भी देखें…
