प्रश्न – ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 के संदर्भ में विकल्प में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) एसडब्ल्यूएम नियम, 2026 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।
(b) बल्क वेस्ट जनरेटर वह इकाई है जो 10,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्र में स्थित हो या 50 किलोग्राम प्रतिदिन से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करती हो।
(c) स्रोत पर ठोस अपशिष्ट का चार श्रेणियों—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल कचरा—में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है।
(d) सीमेंट संयंत्रों और वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों को अगले 6 वर्षों में आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) के उपयोग को 5% से बढ़ाकर 15% करना होगा।
उत्तर – (b)
व्याख्यात्मक उत्तर
- जनवरी 2026 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 को अधिसूचित किया।
- ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।
- नए नियम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का स्थान लेंगे।
- नए नियमों में परिपत्र अर्थव्यवस्था और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के सिद्धांतों को एकीकृत किया गया है, जिनका उद्देश्य अपशिष्ट के कुशल पृथक्करण, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निपटान को सुनिश्चित करना है।
० एसडब्ल्यूएम नियम, 2026 के अंतर्गत स्रोत पर ठोस कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है— - गीला कचरा: रसोई कचरा, फल-सब्ज़ी के छिलके, फूल, मांस आदि, जिनका निपटान कम्पोस्टिंग या बायो-मीथनेशन द्वारा किया जाएगा।
- सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच, लकड़ी आदि, जिन्हें छँटाई और पुनर्चक्रण हेतु सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधाओं (एमआरएफ) में भेजा जाएगा।
- सैनिटरी कचरा: डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टैम्पॉन आदि, जिन्हें सुरक्षित रूप से लपेटकर अलग संग्रहित किया जाएगा।
- विशेष देखभाल कचरा: पेंट कैन, बल्ब, पारा थर्मामीटर, दवाइयाँ आदि, जिन्हें अधिकृत एजेंसियों या नामित संग्रह केंद्रों के माध्यम से एकत्र किया जाएगा।
- बल्क वेस्ट जनरेटर की स्पष्ट परिभाषा दी गई है।
- नए नियमों के अनुसार बल्क वेस्ट जनरेटर वे इकाइयाँ होंगी जिनका निर्मित क्षेत्र 20,000 वर्ग मीटर या अधिक, या जल उपभोग 40,000 लीटर प्रतिदिन या अधिक, ठोस कचरा उत्पादन 100 किलोग्राम प्रतिदिन या अधिक हो।
- इनमें केंद्रीय एवं राज्य सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, संस्थान, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और आवासीय सोसायटी शामिल हैं।
- बल्क वेस्ट जनरेटर द्वारा उत्पन्न कचरे का पर्यावरण-अनुकूल संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
- नए नियमों में विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व (ईबीडब्ल्यूजीआर) का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत बल्क वेस्ट जनरेटर को यथासंभव गीले कचरे का ऑन-साइट प्रसंस्करण करना होगा या वैकल्पिक रूप से ईबीडब्ल्यूजीआर प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा।
- नियमों में अनुपालन न करने की स्थिति में ‘Polluter Pays’ सिद्धांत के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने का प्रावधान किया गया है।
- इसमें बिना पंजीकरण संचालन, गलत रिपोर्टिंग, जाली दस्तावेज़ प्रस्तुत करना तथा अनुचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।
- इस संबंध में दिशानिर्देश केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी किए जाएंगे, जबकि क्षतिपूर्ति राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) अथवा प्रदूषण नियंत्रण समितियों (PCCs) द्वारा लगाई जाएगी।
- नए नियमों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की संपूर्ण प्रक्रिया उत्पादन, संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण, निपटान तथा लेगेसी वेस्ट की बायो-माइनिंग और बायो-रिमेडिएशन की निगरानी के लिए केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने का प्रावधान किया गया है।
- सभी पंजीकरण, प्राधिकरण, रिपोर्टिंग और ऑडिट अब इसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे।
- नए नियमों में कचरा प्रसंस्करण एवं निपटान सुविधाओं के आसपास विकास हेतु ग्रेडेड मानदंड निर्धारित किए गए हैं, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भूमि आवंटन की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
- 5 टन प्रतिदिन से अधिक क्षमता वाली इकाइयों के लिए निर्धारित बफर ज़ोन से संबंधित दिशानिर्देश केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए जाएंगे।
- स्थानीय निकायों को ठोस कचरे के संग्रह, पृथक्करण और परिवहन की जिम्मेदारी दी गई है।
- सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधाओं (एमआरएफ) को ठोस कचरे की छँटाई के औपचारिक केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है।
- नियमों में उद्योगों द्वारा अपशिष्ट से प्राप्त ईंधन (आरडीएफ) के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया गया है।
- सीमेंट संयंत्रों और वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों को चरणबद्ध रूप से पारंपरिक ईंधन के स्थान पर आरडीएफ का उपयोग बढ़ाना होगा, जिसे 6 वर्षों में 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया जाएगा।
- लैंडफिल का उपयोग केवल गैर-पुनर्चक्रणीय, गैर-ऊर्जा-पुनर्प्राप्त अपशिष्ट और जड़ पदार्थों तक सीमित किया गया है।
- अविभाजित कचरे के लैंडफिल में निपटान पर उच्च शुल्क लगाया जाएगा।
- सभी लैंडफिल का वार्षिक ऑडिट अनिवार्य किया गया है।
- लेगेसी वेस्ट डंपसाइट्स का मानचित्रण, आकलन और समयबद्ध बायो-माइनिंग एवं बायो-रिमेडिएशन भी अनिवार्य किया गया है।
- पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
- इनमें पर्यटकों पर यूज़र शुल्क, कचरा प्रबंधन क्षमता के अनुरूप पर्यटन नियमन, तथा होटल और रेस्टोरेंट द्वारा गीले कचरे का विकेन्द्रीकृत प्रसंस्करण शामिल है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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