प्रश्न – महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के दिघी में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण औद्योगिक क्लस्टर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(a) 15 सितंबर, 2026 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के दिघी में ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता – ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
(b) एमडीएल प्रस्तावित क्लस्टर में एंकर शिपयार्ड के रूप में भाग लेगा।
(c) परियोजना में लगभग 27,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।
(d) इस क्लस्टर में केवल युद्धपोतों और पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा।
उत्तर – (d)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 15 सितंबर, 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में रायगढ़ जिले के दिघी (Dighi) में ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता – ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
- यह समझौता माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क महाराष्ट्र लिमिटेड (एनएसएचआईपीएमएल) के बीच हुआ।
- इस समझौते के अंतर्गत एमडीएल प्रस्तावित क्लस्टर में प्रमुख अथवा एंकर शिपयार्ड के रूप में भाग लेगा।
- महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, परियोजना में लगभग 27,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश की संभावना है।
- इस क्लस्टर में बड़े आकार के वाणिज्यिक जहाजों का निर्माण किया जाएगा।
- इससे युद्धपोत और पनडुब्बी निर्माण में विशेषज्ञ एमडीएल का बड़े वाणिज्यिक जहाज निर्माण क्षेत्र में विस्तार होगा।
- परियोजना के माध्यम से आधुनिक जहाज निर्माण अवसंरचना के साथ सहायक उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), प्रौद्योगिकी भागीदारों तथा आपूर्ति-शृंखला से संबंधित उद्योगों का पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा।
- एनएसएचआईपीएमएल एक विशेष प्रयोजन कंपनी (Special Purpose Vehicle—SPV) है।
- इसकी स्थापना महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने संयुक्त रूप से की है।
- यह परियोजना केंद्र सरकार की ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकास योजना के अंतर्गत आगे बढ़ाई जा रही है तथा समुद्री अमृत काल विजन–2047 के उद्देश्यों के अनुरूप है।
- इस परियोजना से घरेलू जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने, प्रौद्योगिकी एवं निवेश आकर्षित करने, कुशल रोजगार पैदा करने और वैश्विक समुद्री उद्योग में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने की अपेक्षा है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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