प्रश्न – मई, 2026 में दक्षिण कोरिया में उद्घाटित भारतीय युद्ध स्मारक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –
- इसका उद्घाटन 21 मई, 2026 को सियोल के इमजिनगैक पार्क में किया गया।
- इसका उद्घाटन भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने संयुक्त रूप से किया।
- यह स्मारक कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (सीएफआई) की भूमिका को सम्मानित करता है।
सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – (d)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 21 मई, 2026 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने 21 मई, 2026 को सियोल के इम्जिंगक पार्क में संयुक्त रूप से भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया।
- यह स्मारक कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और भारतीय सुरक्षा बल (सीएफआई) की भूमिका को सम्मानित करता है।
- कोरियाई स्रोतों के अनुसार यह स्मारक इम्जिंगक, पाजू, ग्योंग्गी प्रांत में स्थित है, जो सियोल के उत्तर में है।
- भारत ने कोरियाई युद्ध में प्रत्यक्ष युद्धक भूमिका नहीं निभाई, लेकिन उसने संयुक्त राष्ट्र ढांचे के तहत चिकित्सा सहायता, युद्धबंदियों की देखरेख और शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने युद्ध के दौरान घायल सैनिकों और नागरिकों की चिकित्सा सेवा की।
- 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए.जी. रंगराज ने किया, जिन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
- यह यूनिट भीषण गोलीबारी के बीच घायल सैनिकों और नागरिकों को चिकित्सा सहायता देने के कारण प्रसिद्ध हुई।
- 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस को उसके मानवीय योगदान के कारण “मरून एंजल्स” की उपाधि से नवाजा गया।
- भारत ने कोरियाई युद्ध के युद्धविराम के बाद की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- इस चरण में कस्टोडियन फोर्स इंडिया (सीएफआई) को तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग (एनएनआरसी) के अंतर्गत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
- एनएनआरसी की अध्यक्षता भारत ने की थी और इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल के. एस. थिमैया ने किया था।
- इस आयोग की स्थापना वर्ष 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद युद्धबंदियों की मानवीय वापसी और उनकी सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।
- सीएफआई ने इस अत्यंत संवेदनशील और जटिल जिम्मेदारी को पेशेवर दक्षता, निष्पक्षता और मानवीय संवेदनशीलता के साथ निभाया।
- भारत के इस योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, मेल-मिलाप और मानवीय सिद्धांतों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के रूप में सराहा गया।
- लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का विशिष्ट नेतृत्व और कूटनीतिक कौशल आज भी कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की रचनात्मक और शांति-उन्मुख भूमिका का स्थायी प्रतीक माना जाता है।
- भारतीय युद्ध स्मारक का निर्माण उसी क्षेत्र में किया गया है, जहां सीएफआई ने सितंबर 1954 में ‘हिंद नगर’ की स्थापना की थी।
- इस स्थान पर लगभग 22,000 युद्धबंदियों को उनकी शांतिपूर्ण स्वदेश वापसी तक रखा गया था।
- इस परियोजना को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की वित्तीय सहायता से पूरा किया गया है, जो भारत और कोरिया गणराज्य के बीच साझा इतिहास और स्थायी मित्रता के प्रति भारत के गहरे सम्मान को दर्शाता है।
- इस समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, राजनयिक समुदाय के सदस्य और अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
- लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. ए. जी. रंगराज की भतीजी कल्पना प्रसाद भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।
- कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्राल ने इस माह को कर्नल रंगराज के सम्मान में समर्पित किया है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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