चेन्नई में शहरी परीक्षण केंद्र और एरोसोल वेधशाला का उद्घाटन

प्रश्न – भारत के पहले अत्याधुनिक शहरी परीक्षण केंद्र और एरोसोल वेधशाला के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. इसका उद्घाटन 6 मई, 2026 को चेन्नई के रामपुरम स्थित एसआरएम विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (एसआरएमआईएसटी) में किया गया।
  2. इसका उद्घाटन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने किया।
  3. इसकी स्थापना भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा की गई है।
    उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
    (a) केवल 1 और 2
    (b) केवल 2 और 3
    (c) केवल 1 और 3
    (d) 1, 2 और 3
    उत्तर – (a)
    व्याख्यात्मक उत्तर
  • 6 मई, 2026 को चेन्नई के रामपुरम स्थित एसआरएम विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (एसआरएमआईएसटी) में भारत अपनी तरह के पहले अत्याधुनिक शहरी परीक्षण केंद्र (Urban Testbed) और एरोसोल वेधशाला का उद्घाटन किया गया।
  • इसका उद्घाटन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने किया।
  • इस अत्याधुनिक शहरी परीक्षण केंद्र (Urban Testbed) और एरोसोल वेधशाला की स्थापना पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) द्वारा की गई है
  • इस केंद्र में लगभग 15 अत्याधुनिक उपकरण हैं जिनकी कीमत 60 करोड़ रुपये से अधिक है।
  • ये उपकरण मौसम के पैटर्न, हवा के प्रवाह, एरोसोल कणों और तापमान में बदलाव सहित लगभग 50 प्रकार के वायुमंडलीय आंकड़ों को ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
  • ‘मिशन मौसम’ के तहत, यह केंद्र शहरी मौसम, एरोसोल कणों, बादलों, वर्षा और तापमान में बदलाव का अध्ययन करेगा।
  • चेन्नई स्थित शहरी परीक्षण केंद्र में लगभग 100 एडब्ल्यूएस स्टेशन लगाए जाएंगे।
  • ये स्टेशन शहरी क्षेत्रों और उपनगरीय संक्रमण क्षेत्रों को कवर करेंगे।
  • इस केंद्र में तीन अतिरिक्त X-बैंड रडार लगाए जाएंगे।
  • इनमें एक फेज़्ड ऐरे रडार भी शामिल होगा।
  • ये रडार शहर की ओर आने वाले संवहनीय बादलों और वर्षा क्षेत्रों की निरंतर निगरानी करेंगे।
  • मुख्य शहरी क्षेत्र में एक एरोसोल अवलोकन सुविधा स्थापित की जाएगी।
  • यह सुविधा एरोसोल के भौतिक और रासायनिक गुणों का इन-सीटू मापन करेगी।
  • एरोसोल के बादल निर्माण से जुड़े गुणों का भी अध्ययन किया जाएगा।
  • चयनित स्थानों पर बादल, एरोसोल और वर्षा की ऊर्ध्वाधर प्रोफाइलिंग की जाएगी।
  • रेडियोमीटर, विंड प्रोफाइलर, लिडार और सोडार जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।
  • इन उपकरणों से समुद्री हवा और स्थलीय हवा के गतिशील पहलुओं को समझा जाएगा।
  • चयनित स्थानों पर ऊष्मागतिकीय प्रोफाइलिंग भी की जाएगी।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2258435&reg=3&lang=1