ग्रीन इंडिया मिशन पर सीएजी की निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट, 2026

प्रश्न – ग्रीन इंडिया मिशन की निष्पादन लेखापरीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –

  1. सीएजी की रिपोर्ट संख्या 4, वर्ष 2026 संसद में 12 अगस्त 2026 को प्रस्तुत की गई।
  2. लेखापरीक्षा में वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक की अवधि को शामिल किया गया।
  3. लेखापरीक्षा केवल पूर्वोत्तर राज्यों में की गई थी।
    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
    (a) केवल 1
    (b) केवल 1 और 2
    (c) केवल 2 और 3
    (d) 1, 2 और 3
    उत्तर – (b)
    व्याख्यात्मक उत्तर
  • 12 अगस्त 2026 को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ग्रीन इंडिया मिशन पर निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट संख्या 4, वर्ष 2026 को संसद में प्रस्तुत किया गया।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन संचालित ग्रीन इंडिया मिशन की लेखापरीक्षा में वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इसकी योजना, क्रियान्वयन तथा निगरानी की जांच की गई।
  • सीएजी के अनुसार, विभिन्न योजनाओं के बीच अभिसरण ग्रीन इंडिया मिशन की रणनीति का केंद्रीय तत्व था, लेकिन संस्थागत स्तरों पर इसका अभाव दिखाई दिया।
  • मिशन की गतिविधियों को प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और केंद्र एवं राज्यों की अन्य वनीकरण योजनाओं के साथ प्रभावी ढंग से नहीं जोड़ा गया।
  • नगर वन योजना और स्कूल नर्सरी योजना जैसी योजनाएं भी अलग-अलग ढंग से संचालित होती रहीं।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के बजाय कम अथवा मध्यम प्राथमिकता वाले भू-दृश्यों का चयन किया गया।
  • इससे मिशन के मूल उद्देश्यों की प्राप्ति प्रभावित हुई।
  • वित्तीय प्रबंधन भी मिशन की बड़ी कमजोरी रहा।
  • नमूने में जांची गई 68 वार्षिक कार्ययोजनाओं में से केवल छह योजनाएं वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले मंत्रालय को प्राप्त हुईं।
  • इनमें से एक भी योजना को समय पर स्वीकृति नहीं मिली।
  • योजनाओं में प्रभावी अभिसरण नहीं होने के कारण प्रस्तावित 10,600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्राप्त नहीं हो सकी।
  • प्रारंभिक चार वर्षों के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 12वीं पंचवर्षीय योजना से 2,000 करोड़ रुपये तथा राज्यों के हिस्से के रूप में 13वें वित्त आयोग के अनुदान से 400 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे।
  • इसके विपरीत, दस वर्षों के दौरान बजटीय सहायता के रूप में केवल 1,149.14 करोड़ रुपये, अर्थात स्वीकृत राशि का 47.88 प्रतिशत, ही प्राप्त हुआ।
  • बजटीय बाधाओं और कमजोर क्रियान्वयन का सीधा प्रभाव वन आवरण संबंधी लक्ष्यों पर पड़ा।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

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