प्रश्न – निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(a) 6 अप्रैल, 2026 को कल्पक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने प्रथम क्रिटिकैलिटी प्राप्त की।
(b) पीएफबीआर की विद्युत क्षमता 500 मेगावाट है।
(c) यह रिएक्टर भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (NPCIL) द्वारा विकसित और निर्मित किया गया है।
(d) पूर्ण रूप से संचालन में आने पर भारत रूस के बाद वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश बनेगा।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 6 अप्रैल, 2026 को तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने सफलतापूर्वक अपनी प्रथम क्रिटिकैलिटी (स्व-धारित नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया की स्थिति) प्राप्त की।
- 500 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला यह रिएक्टर भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित किया गया है।
- इस उपलब्धि के साथ भारत ने अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है, जिसकी परिकल्पना महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने की थी।
- पूर्ण रूप से संचालन में आने के बाद, भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा जो एक वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का संचालन करेगा।
- क्रिटिकैलिटी वह अवस्था है जब किसी परमाणु रिएक्टर में नाभिकीय विखंडन की श्रृंखला अभिक्रिया स्वयं-संचालित और नियंत्रित रूप से प्रारंभ हो जाती है।
- इस स्थिति में उत्पन्न न्यूट्रॉनों की संख्या उतनी ही होती है जितनी कि अवशोषित या बाहर निकलने वाले न्यूट्रॉनों की, जिससे ऊर्जा उत्पादन स्थिर बना रहता है।
- यह चरण निर्माण से संचालन की ओर संक्रमण का संकेत देता है और भविष्य में विद्युत उत्पादन का आधार बनता है।
- पीएफबीआर की विशेषता यह है कि यह पारंपरिक रिएक्टरों की तुलना में अधिक उन्नत तकनीक पर आधारित है।
- यह न केवल ऊर्जा उत्पन्न करता है, बल्कि उपयोग किए गए ईंधन से अधिक विखंडनीय पदार्थ भी उत्पन्न करता है, जिसे “ब्रीडिंग” कहा जाता है।
- यह तकनीक भारत के थोरियम-आधारित ऊर्जा कार्यक्रम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के पास थोरियम के विशाल भंडार हैं।
- भारत की वर्तमान परमाणु क्षमता 8.78 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है।
- वर्ष 2024–25 में, देश भर में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने 56,681 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन किया।
- वर्ष 2024–25 में इसका हिस्सा 3.1% रहा।
- स्वदेशी 700 मेगावाट (एमडब्ल्यू) रिएक्टरों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित किए जा रहे 1,000 मेगावाट रिएक्टरों के साथ, स्थापित क्षमता वर्ष 2031–32 तक 22.38 गीगावाट (जीडब्ल्यू) तक पहुँचने का अनुमान है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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