प्रश्न – ओषधि एवं प्रसाधन सामग्री (अपराधों का शमन) नियम, 2025 के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- ये नियम 25 अप्रैल, 2025 से प्रभाव में आए हैं।
- कंपाउंडिंग अथॉरिटी का पद केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर लाइसेंसिंग अथॉरिटी से नीचे का हो सकता है।
- केवल पहली बार अपराध करने वालों को कारावास का प्रावधान है, जबकि बार-बार अपराध करने वालों को केवल जुर्माना देना होगा।
- गलत लेबलिंग, ओवर-राइटिंग जैसे अपराधों को मामूली अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
उपरोक्त में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) केवल कथन 2 (b) केवल कथन 3
(c) केवल कथन 1 और 4 (d) कोई नहीं
उत्तर – (b)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 24 अप्रैल, 2025 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ओषधि एवं प्रसाधन सामग्री (अपराधों का शमन) नियम, 2025 अधिसूचित किया
- इस पहल का उद्देश्य ओषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत छोटे अपराधों के समाधान को कारगर बनाना है।
- ये नियम 25 अप्रैल, 2025 से प्रभावी हुए।
- यह नियम किसी भी दवा कंपनी, या अधिनियम के अंतर्गत विनिर्माण, आयात, बिक्री, वितरण या अन्य गतिविधि में शामिल किसी भी अन्य व्यक्ति पर लागू होता है।
- केंद्र सरकार वरिष्ठ स्तर पर एक कंपाउंडिंग अथॉरिटी नियुक्त करेगी।
- इस अथॉरिटी का पद लाइसेंसिंग अथॉरिटी से कम नहीं होना चाहिए।
- इसी प्रकार राज्य सरकारें लाइसेंसिंग अथॉरिटी से नीचे के रैंक के अधिकारियों को इस पद पर नियुक्त करेंगी।
- कोई भी कंपनी या व्यक्ति कम्पाउंडिंग ऑफेंस के लिए आवेदन कर सकता है
- आवेदन प्राप्त होने पर, कंपाउंडिंग अथॉरिटी रिपोर्टिंग अथॉरिटी से रिपोर्ट मांग सकती है।
- यह रिपोर्ट 1 महीने के भीतर प्रदान की जानी चाहिए।
- यदि आवेदन स्वीकृत हो जाता है तो अथॉरिटी अभियोजन से प्रतिरक्षा प्रदान कर सकती है।
- आवेदक को इस प्रतिरक्षा को सुरक्षित करने के लिए 30 दिनों के भीतर निर्दिष्ट कंपाउंडिंग राशि का भुगतान करना होगा।
- केवल पहली बार अपराध करने वालों पर ही जुर्माना लगाया जाएगा, और बार-बार अपराध करने वालों को जुर्माना भरना होगा और कारावास का सामना करना पड़ेगा।
- दवा पैकेजिंग के लेबल में गलत छपाई, या ओवर-राइटिंग, या लॉजिस्टिक मुद्दे, या दवाओं की पूरी सूची प्रदर्शित नहीं करना आदि जैसे अपराधों को मामूली अपराध माना जाएगा।
- कंपाउंडिंग प्राधिकरण को किसी कंपनी या व्यक्ति को अभियोजन से छूट प्रदान करने तथा कुछ शर्तों के साथ उसे वापस लेने का अधिकार दिया गया है।
- यदि व्यक्ति या कंपनी जुर्माना अदा करने में विफल रहती है, या यह पाया जाता है कि उसने कोई विशेष सामग्री छिपाई है या झूठे साक्ष्य दिए हैं, तो यह प्रतिरक्षा वापस ली जा सकती है।
- ये कंपाउंडिंग नियम जन विश्वास अधिनियम 2023 के अनुरूप हैं, जो कुछ जुर्मानों को दंड के रूप में पुनर्वर्गीकृत करता है, जिससे कानूनी कार्यवाही की आवश्यकता कम हो जाती है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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