एनआईपीईआर-बोहरिंगर समझौता और अमृत्व कोहोर्ट–2 का शुभारंभ

प्रश्न – निम्नलिखित में से अमृत्व (औषधीय अनुसंधान, नवाचार, अनुवादात्मक शोध और मूल्य त्वरण के लिए गठबंधन) के कोहोर्ट–2 के संबंध में कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(a) अमृत्व का उद्देश्य शोध परिणामों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुँचाकर उन्हें व्यावसायिक उत्पादों एवं स्टार्टअप में परिवर्तित करना है।
(b) यह कार्यक्रम एसआईआईसी, आईआईटी कानपुर द्वारा एनआईपीईआर, रायबरेली के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
(c) कोहोर्ट–2 के अंतर्गत कुल छह नवप्रवर्तकों को अनुदान सहायता प्रदान की गई है।
(d) संकाय-नेतृत्व परियोजनाओं को 8 लाख रुपये तथा शोधार्थी-नेतृत्व परियोजनाओं को 6 लाख रुपये की सहायता दी गई है।
उत्तर – (c)


व्याख्यात्मक उत्तर

  • 19 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) , रायबरेली और बोहरिंगर इंगेलहाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता – ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
  • यह समझौता औषधि विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के सचिव मनोज जोशी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
  • इस समझौता – ज्ञापन में नवीन औषधि वितरण प्रणाली उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-एनडीडीएस) भी शामिल है।
  • यह फार्मास्युटिकल प्रौद्योगिकियों, नवीन औषधि वितरण प्रणालियों, अकादमिक आदान-प्रदान और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों जैसे क्षेत्रों में अकादमिक और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने के लिए एक ढांचा स्थापित करता है।
  • इस सहयोग के तहत बोह्रिंगर इंगेलहाइम शोधकर्ताओं एवं संस्थानों को अपने opnMe® ओपन साइंस प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्रदान करेगा जिससे वैज्ञानिक आदान-प्रदान संभव होगा और स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को गति मिलेगी।
  • इस अवसर पर अमृत्व (औषधीय अनुसंधान, नवाचार, अनुवादात्मक शोध और मूल्य त्वरण के लिए गठबंधन) के दूसरे चरण, अर्थात् कोहोर्ट–2, का भी शुभारंभ किया गया।
  • अमृत्व का उद्देश्य शोध परिणामों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुँचाना और उन्हें व्यावसायिक उत्पादों तथा स्टार्टअप उद्यमों में परिवर्तित करना है।
  • यह कार्यक्रम स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी), आईआईटी कानपुर द्वारा एनआईपीईआर, रायबरेली के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
  • यह पहल बोह्रिंगर इंगेलहाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत समर्थित है।
  • कोहोर्ट–2 के अंतर्गत पाँच नवप्रवर्तकों को अनुदान सहायता प्रदान की गई है, जिनमें तीन संकाय-नेतृत्व परियोजनाएँ और दो शोधार्थी-नेतृत्व परियोजनाएँ शामिल हैं।
  • संकाय सदस्यों द्वारा संचालित तीन परियोजनाओं को आठ लाख रुपये प्रत्येक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है जबकि शोधार्थियों द्वारा संचालित दो परियोजनाओं को छह लाख रुपये प्रत्येक की सहायता दी गई है।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.newsage.in/niper-boehringer-mou-amritva-cohort-2/