इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना के तीसरे चरण के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी

प्रश्न – 2 जनवरी, 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना के तीसरे चरण के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन / तथ्य सही नहीं है?
(a) ईसीएमएस के तीसरे चरण में 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनसे लगभग 41,863 करोड़ रुपये का निवेश और 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
(b) अब तक ईसीएमएस के अंतर्गत कुल 46 परियोजनाएँ स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनसे 54,567 करोड़ रुपये का कुल निवेश और लगभग 51,000 प्रत्यक्ष रोजगार की उम्मीद है।
(c) एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न और लिथियम-आयन बैटरी से जुड़े घटकों का घरेलू स्तर पर निर्माण प्रारंभ होने से भारत की आयात निर्भरता में कमी आएगी।
(d) ईसीएमएस योजना केवल मोबाइल फोन और आईटी हार्डवेयर क्षेत्र तक सीमित है, तथा इसमें ऑटोमोटिव, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार क्षेत्र शामिल नहीं हैं।
उत्तर – (d)


व्याख्यात्मक उत्तर

  • 2 जनवरी, 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रोनिक घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तीसरे चरण के अंतर्गत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है।
  • इन परियोजनाओं में 41,863 करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश, 2,58,152 करोड़ रुपये का संभावित उत्पादन तथा लगभग 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन होने की संभावना है।
  • इन प्रस्तावों में मोबाइल, दूरसंचार, उपभोक्ता, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर सहित 11 क्षेत्रों में उत्पाद निर्माण शामिल है।
  • यह स्वीकृति पहले से अनुमोदित 24 परियोजनाओं (12,704 करोड़ रुपये) के अतिरिक्त है, जिसके साथ ही अब तक ईसीएमएस के अंतर्गत कुल 46 परियोजनाएँ स्वीकृत की जा चुकी हैं।
  • इनसे 54,567 करोड़ रुपये का कुल निवेश और लगभग 51,000 प्रत्यक्ष रोजगार सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
  • यह योजना इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य शृंखला के उन 11 रणनीतिक उत्पादों पर केंद्रित है, जिनका उपयोग मोबाइल फोन, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, रणनीतिक उपकरणों और आईटी हार्डवेयर जैसे विविध क्षेत्रों में होता है।
  • इनमें पीसीबी, कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोज़र, लिथियम-आयन सेल, कैमरा एवं डिस्प्ले मॉड्यूल, ऑप्टिकल ट्रांससीवर तथा एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न, एनोड मटेरियल और कॉपर क्लैड लैमिनेट जैसे महत्वपूर्ण सप्लाई-चेन घटक शामिल हैं।
  • विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि अब तक आयात पर निर्भर रहे एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न और लिथियम-आयन बैटरी से जुड़े घटकों का निर्माण देश में ही किया जाएगा, जिससे भारत की आयात निर्भरता में निर्णायक कमी आएगी।
  • पीसीबी (एचडीआई सहित) के विनिर्माण की मंजूरी 9 आवेदकों को दी गई है, जिनमें इंडिया सर्किट्स प्राइवेट लिमिटेड, वाइटल इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, सिग्नुम इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एपिटोम कंपोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, बीपीएल लिमिटेड, एटी एंड एस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एसेंट-के सर्किट प्राइवेट लिमिटेड, सीआईपीएसए टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और शोगिनी टेक्नोआर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
  • इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में ऊर्जा भंडारण और पावर कंडीशनिंग के लिए आवश्यक कैपेसिटर के विनिर्माण की मंजूरी डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और टीडीके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है।
  • हाई-स्पीड कनेक्टर्स के विनिर्माण की मंजूरी एम्फेनॉल हाई स्पीड टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है।
  • इसके अतिरिक्त, मोबाइल, आईटी हार्डवेयर उत्पादों और संबंधित उपकरणों के लिए इनक्लोजर बनाने की मंजूरी युझान टेक्नोलॉजी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ( इलेक्ट्रॉनिक घटकों की एक वैश्विक निर्माता कंपनी), मदरसन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (इलेक्ट्रॉनिक घटकों और प्रणालियों की एक प्रमुख भारतीय निर्माता कंपनी) और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (एक प्रमुख भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता और एक विश्वसनीय वैश्विक ब्रांड) को दी गई है।
  • अनुप्रयोगों के लिए लिथियम-आयन सेल बनाने के लिए लिथियम-आयन सेल विनिर्माण में अग्रणी वैश्विक कंपनियों में से एक, एटीएल बैटरी टेक्नोलॉजी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को यह मंजूरी मिली है।
  • सब-असेंबली श्रेणी में, ऑप्टिकल ट्रांससीवर (एसएफपी) के विनिर्माण के लिए डिक्सन इलेक्ट्रोकनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को ; कैमरा मॉड्यूल सब असेंबली के विनिर्माण के लिए कुनशान क्यू टेक माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को; और डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली के निर्माण के लिए सैमसंग डिस्प्ले नोएडा प्राइवेट लिमिटेड को, जो वैश्विक स्तर पर शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांडों में से एक है, अनुमोदन दिया गया है ।
  • इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए, एनपीएसपीएल एडवांस्ड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड को एनोड सामग्री के निर्माण के लिए भी मंजूरी दी गई है , जो लिथियम-आयन सेल निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण वस्तु है और लिथियम-आयन सेल की ऊर्जा घनत्व और जीवन-चक्र निर्धारित करती है।
  • विप्रो ग्लोबल इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रॉनिक मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड को लैमिनेट (कॉपर क्लैड) के निर्माण के लिए मंजूरी दी गई है, जो पीसीबी निर्माण के लिए आधार सामग्री है और पीसीबी निर्माण की सामग्री सूची का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (~30 प्रतिशत) है।
  • हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड को मोबाइल फोन के इनक्लोजरों के लिए एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न के विनिर्माण के लिए मंजूरी दी गई है , जिसका वर्तमान में 100 प्रतिशत आयात किया जा रहा है।
  • स्वीकृत इकाइयां आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित आठ राज्यों में फैली हुई हैं।
  • अनुमोदन के नवीनतम चरण के साथ, ईसीएमएस के तहत अब तक 11 राज्यों में कुल 46 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें कुल 54,567 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इससे लगभग 51,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2210864&reg=3&lang=2

https://www.thehindu.com/business/Industry/it-ministry-approves-22-more-firms-for-component-incentives/article70464130.ece

https://www.newsonair.gov.in/centre-approves-22-electronics-manufacturing-projects-with-%E2%82%B941863-crore-investment