आरबीआई – ईएसएमए के मध्य समझौता

प्रश्न – 27 जनवरी, 2026 को भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और यूरोपीय प्रतिभूति और बाजार प्राधिकरण (ईएसएमए) के बीच हुए समझौता–ज्ञापन (MoU) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन 1: इस समझौता–ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) तथा RBI द्वारा विनियमित अन्य केंद्रीय काउंटरपार्टियों (CCPs) को यूरोपीय संघ के वित्तीय ढांचे में औपचारिक मान्यता देना है।
कथन 2: इस समझौते के अंतर्गत आरबीआई और ईएसएमए केंद्रीय काउंटरपार्टियों से संबंधित नियामकीय एवं पर्यवेक्षणीय मामलों में सहयोग, परामर्श और सूचना के आदान-प्रदान पर सहमत हुए हैं।
कथन 3: समझौता–ज्ञापन के अनुसार, भारत में केंद्रीय काउंटरपार्टियों की स्थिरता और लचीलापन (Resilience) सुनिश्चित करने की मुख्य जिम्मेदारी ईएसएमए की होगी।
कथन 4: यह समझौता–ज्ञापन केंद्रीय मंत्रिमंडल की पूर्व स्वीकृति के बाद हस्ताक्षरित किया गया था।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
(a) केवल कथन 3 (b) केवल कथन 1 और 2
(c) केवल कथन 2 और 4 (d) कथन 1, 3 और 4
उत्तर – (a)


व्याख्यात्मक उत्तर

  • 27 जनवरी, 2026 को भारत के वित्तीय क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और यूरोपीय प्रतिभूति एवं बाजार प्राधिकरण (ईएसएमए) के बीच एक समझौता – ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
  • यह समझौता भारत यात्रा पर आए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
  • इस समझौता – ज्ञापन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति भी प्राप्त थी।
  • इस समझौता ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) तथा आरबीआई द्वारा विनियमित अन्य केंद्रीय काउंटरपार्टियों को औपचारिक मान्यता प्रदान करना है।
  • यह कदम भारतीय क्लियरिंग और सेटलमेंट प्रणाली को यूरोपीय संघ के वित्तीय ढांचे के साथ जोड़ने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
  • इस समझौता – ज्ञापन के अंतर्गत आरबीआई और ईएसएमए आपसी परामर्श, सहयोग और सूचना के आदान-प्रदान के माध्यम से उन केंद्रीय काउंटरपार्टियों से संबंधित नियामकीय और पर्यवेक्षणीय मामलों पर कार्य करेंगे, जिन्हें इस समझौते के अंतर्गत शामिल किया गया है।
  • इसके साथ ही, इन केंद्रीय काउंटरपार्टियों द्वारा मान्यता की शर्तों के अनुपालन की निगरानी भी की जाएगी।
  • समझौते में यह स्पष्ट किया गया है कि ईएसएमए, अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में, आवश्यकता अनुसार RBI की नियामकीय व्यवस्था और पर्यवेक्षण ढांचे पर भरोसा करेगा।
  • साथ ही, यह भी स्वीकार किया गया है कि भारत में इन केंद्रीय काउंटरपार्टियों की स्थिरता और लचीलापन (Resilience) सुनिश्चित करने की मुख्य जिम्मेदारी आरबीआई की ही बनी रहेगी।
  • यह समझौता – ज्ञापन केवल एक आशय-पत्र (Statement of Intent) है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी बाध्यता उत्पन्न नहीं करता, न ही कोई अधिकार प्रदान करता है और न ही यह किसी देश के घरेलू कानूनों का अतिक्रमण करता है।

लेखक- विजय प्रताप सिंह

संबंधित लिंक भी देखें…

https://www.esma.europa.eu/press-news/esma-news/esma-signs-memorandum-understanding-reserve-bank-india

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