प्रश्न – वायबिलिटी प्लान 2.0 के संबंध में कौन सा कथन सही नहीं है?
(a) इसे वित्तीय सेवा विभाग ने मई 2026 में मंजूरी दी।
(b) यह क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए संशोधित तीन-वर्षीय ढांचा है।
(c) इसका उद्देश्य केवल शहरी बैंकों की लाभप्रदता बढ़ाना है।
(d) इसका लक्ष्य आरआरबी की वित्तीय स्थिरता और परिचालन दक्षता को सुधारना है।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- मई, 2026 में वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए वायबिलिटी प्लान 2.0 को मंजूरी प्रदान की है।
- यह एक संशोधित तीन-वर्षीय ढांचा है, जिसका उद्देश्य देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैकों की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना और उनकी परिचालन दक्षता में सुधार करना है।
- डीएफएस ने इससे पहले आरआरबी में प्रदर्शन निगरानी को संस्थागत रूप देने और शासन सुधारों को मजबूत करने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक का तीन-वर्षीय वायबिलिटी प्लान लागू किया था।
- इस योजना ने आरआरबी के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार लाने और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उभरती वित्तीय क्षेत्र की चुनौतियों और निरंतर निगरानी की आवश्यकता को देखते हुए डीएफएस ने अब 2025-26 से 2027-28 तक की अवधि के लिए वायबिलिटी प्लान 2.0 को मंजूरी दी है।
- इसका मुख्य लक्ष्य आरआरबी की वित्तीय स्थिरता, दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता और संस्थागत दक्षता को बढ़ाना है।
- वायबिलिटी प्लान 2.0 में 30 प्रदर्शन मानक निर्धारित किए गए हैं, जो चार प्रमुख स्तंभों ऑपरेशनल एक्सीलेंस (परिचालन उत्कृष्टता), एसेट क्वालिटी (परिसंपत्ति गुणवत्ता), प्रॉफिटेबिलिटी (लाभप्रदता) और ग्रोथ (विकास) पर आधारित है।
- इन चार स्तंभों के प्रमुख महत्वपूर्ण मानकों में सीआरएआर, ऋण-जमा अनुपात, डिजिटल एडॉप्शन, एनपीए लेवल्स, रिकवरी परफॉर्मेंस, प्रॉफिटेबिलिटी रेश्यो और भारत सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन में प्रदर्शन शामिल हैं।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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