प्रश्न – निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘अपना पिन कोड जानें’ पोर्टल के संदर्भ में सही है?
(a) यह केवल शहरी क्षेत्रों के लिए काम करता है।
(b) उपयोगकर्ता GPS के माध्यम से सटीक पिन कोड प्राप्त कर
सकते हैं।
(c) यह सेवा केवल सरकारी विभागों को दी जाती है।
(d) इसमें कोई फीडबैक सिस्टम नहीं है।
उत्तर – (b)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 27 मई, 2025 को डाक विभाग, संचार मंत्रालय ने दो क्रांतिकारी डिजिटल पोर्टल ‘अपना डिजिपिन जानें’ और ‘अपना पिन कोड जानें’ लॉन्च किया।
- ये पहल राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 के अनुरूप हैं, जो डिजिटल गवर्नेंस और सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए एक उन्नत भू-स्थानिक अवसंरचना के निर्माण का लक्ष्य रखती है।
- डिजिपिन (डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर) एक ओपन-सोर्स, इंटरऑपरेबल, जियो-कोडेड और ग्रिड-आधारित डिजिटल पता प्रणाली है।
- इसे आईआईटी हैदराबाद और एनआरएससी-इसरो के सहयोग से विकसित किया गया है।
- उपयोगकर्ता अपनी भौगोलिक स्थिति (GPS Coordinates) से अपना डिजिपिन प्राप्त कर सकते हैं।
- अक्षांश-देशांश (Latitude/Longitude) दर्ज करके डिजिपिन जान सकते हैं और इसके विपरीत भी।
- यह प्रणाली ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करती है।
- एड्रेस-एज-ए-सर्विस (एएएएस)) के रूप में विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों को सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
- यह सेवा जीआईएस – आधारित डिजिटल डिलीवरी के लिए आधार तैयार करती है।
- जीआईटीहब पर पूर्ण तकनीकी दस्तावेज और स्रोत कोड उपलब्ध कराया गया है, जिससे देशभर में ओपन कोलैबोरेशन को बढ़ावा मिलेगा।
- भारत में 6 अंकों की पिन कोड प्रणाली की शुरुआत 1972 में हुई थी।
- अब इसे और अधिक भू-सटीक (Geo-accurate) बनाने के लिए देशभर में राष्ट्रीय जियो-फेंसिंग अभ्यास किया गया।
- इसके आधार पर, डाक विभाग ने अब ‘अपना पिन कोड जानें’ वेब एप्लिकेशन लॉन्च किया है।
- उपयोगकर्ता अपनी वर्तमान जीएनएसएस लोकेशन से संबंधित सही पिन कोड की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- उपयोगकर्ता पिन कोड की सटीकता पर फीडबैक दे सकते हैं, जिससे डेटा को निरंतर अपडेट किया जा सके।
- देशभर के पिन कोड बॉउंडरी डेटा को “ऑल इंडिया पिन कोड बाउंड्री जियो-जेएसओएन ” शीर्षक से ओपन गवर्नमेंट डेटा प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया है।
- दोनों पोर्टल्स में डेटा की सटीकता व उपयोगिता पर फीडबैक देने का विकल्प शामिल है।
- नागरिकों, डेवलपर्स, संस्थानों और नीति निर्माताओं से इन पोर्टल्स के उपयोग व सुझाव देने का आग्रह किया गया है।
- ‘अपना डिजिपिन जानें’ और ‘अपना पिन कोड जानें’ की शुरुआत से भारत की भू-स्थानिक शासन प्रणाली, पते की सटीकता, और सेवा वितरण की दक्षता में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है।
लेखक- विजय प्रताप सिंह
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