ब्याज समकरण योजना (IES)

प्रश्न-ढुलाई पूर्व एवं उपरांत रुपया निर्यात ऋण हेतु ब्याज समकरण योजना का कार्यान्वयन कब से किया जा रहा है?
(a) 1 अप्रैल, 2015
(b) 1 अप्रैल, 2016
(c) 1 अप्रैल, 2017
(d) 1 अप्रैल, 2018
उत्तर-(a)
संबंधित तथ्य

  • 2 जनवरी, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति ने ‘ढुलाई पूर्व एवं उपरांत रुपया निर्यात ऋण हेतु ब्याज समकरण योजना’ (IES) के तहत वाणिज्यिक निर्यातकों को शामिल करने के वाणिज्य विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।
  • इसके अंतर्गत वाणिज्यिक निर्यातकों को उक्त योजना में चिह्नित 416 टैरिफ लाइनों के दायरे में आने वाले उत्पादों के निर्यात के लिए इस तरह के ऋण पर 3% के ब्याज समकरण दर की अनुमति होगी।
  • ये उत्पादन प्रमुखतः कृषि, वस्त्र, चमड़ा, हस्तशिल्प, चमड़ा, मशीनरी आदि जैसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम/श्रम बहुल क्षेत्रों से संबंधित हैं।
  • उक्त प्रस्ताव से योजना की शेष अवधि में निर्यातकों को ब्याज समकरण पर लगभग 600 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त होगा।
  • ढुलाई पूर्व एवं उपरांत रुपया निर्यात ऋण हेतु ब्याज समकरण योजना का कार्यान्वयन 1 अप्रैल, 2015 से 5 वर्षों के लिए किया जा रहा है।
  • उक्त योजना में 4 अंकों वाली चिह्नित 416 टैरिफ लाइनों का निर्यात करने वाले समस्त विनिर्माता निर्यातकों के लिए ढुलाई पूर्व एवं उपरांत रुपया ऋणों पर 3% के ब्याज समकरण दर का प्रावधान है।
  • साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम द्वारा उत्पादन एवं निर्यात किए जाने वाले सभी वाणिज्यिक उत्पादों पर 5% के ब्याज समकरण दर का प्रावधान है।

संबंधित लिंक भी देखें…
http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=187067
https://www.rbi.org.in/scripts/NotificationUser.aspx?Id=11453&Mode=0
https://www.thehindubusinessline.com/economy/merchant-exporters-included-in-interest-equalisation-scheme-says-rbi/article25979083.ece

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