आर्थिक समीक्षाः 2018-19

प्रश्न-4 जुलाई, 2019 को केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा पेश की। इससे संबंधित निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
(i) वर्ष 2019-20 में जीडीपी में वृद्धि का अनुमान है।
(ii) वर्ष 2018-19 में जीडीपी की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही।
(iii) केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा वर्ष 2017-18 में जीडीपी के 3.5 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2018-19 में 3.4 प्रतिशत रह गया।
(iv) देश में कुल विद्युत उत्पादन में नवीकरणीय विद्युत का अंश (पनबिजली के 25 मेगावॉट से अधिक को छोड़कर) वर्ष 2014-15 के 6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 10 प्रतिशत हो गया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से/सा कथन सही है?

(a) केवल (i) (iii) (iv)
(b) केवल (i) (ii) (iv)
(c) केवल (i) एवं (iv)
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर-(a)
संबंधित तथ्य
  • 4 जुलाई, 2019 को केंद्रीय वित्त एवं कॉरर्पोट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा, 2018-19 प्रस्तुत की।
  • आर्थिक समीक्षाः 2018-19 की मुख्य बातें
  • वर्ष 2018-19 में भारत अब भी तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
  • जीडीपी की वृद्धि दर वर्ष 2017-18 में 7.2 प्रतिशत की जगह वर्ष 2018-19 में 6.8 प्रतिशत हुई।
  • वर्ष 2019-20 में जीडीपी की वृद्धि दर में बढ़ोतरी की संभावना है।
  • 2018-19 में मुद्रास्फीति की दर 3.4 प्रतिशत तक सीमित रही।
  • चालू खाता जीडीपी के 2.1 प्रतिशत पर समायोजित करने योग्य है।
  • केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 2017-18 में जीडीपी के 3.5 प्रतिशत से घटकर 2018-19 में 3.4 प्रतिशत रह गया।
  • विदेशी क्षेत्र
  • डब्ल्यूटीओ के अनुसार विश्व व्यापार का विकास वर्ष 2017 के 4.6 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2018 में कम होकर 3 प्रतिशत रह गया है।
  • कारणः
  • नई और बदला लेने की प्रवृत्ति से प्रेरित टैरिफ उपाय।
  • यूएस-चीन के बीच व्यापार तनाव में बढ़ोत्तरी।
  • कमजोर वैश्विक आर्थिक विकास।
  • वित्तीय बाजार में अनिश्चितता (डब्ल्यूटीओ)।
  • भारतीय मुद्रा के संदर्भ में रुपये के अवमूल्यन के कारण जहां वर्ष 2018-19 के दौरान निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई, वहीं आयात में कमी आई।
  • वर्ष 2018-19 के अप्रैल-दिसंबर के दौरान कुल पूंजी प्रवाह मध्यम स्तर का रहा, जबकि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के प्रवाह में तेजी रही। इसका कारण पोर्टफोलियो निवेश के अंतर्गत निकासी की उच्च मात्रा रही।
  • दिसंबर, 2018 तक भारत का विदेशी ऋण 521.1 बिलियन डॉलर था। यह मार्च, 2018 के स्तर से 1.6 प्रतिशत कम है।
  • विदेशी ऋण के संकेतक बताते हैं कि भारत का विदेशी ऋण दीर्घावधि का नहीं है।
  • कुल देयताएं और जीडीपी का अनुपात (ऋण और गैर-ऋण घटकों के समावेश के साथ) वर्ष 2015 के 43 प्रतिशत से कम होकर वर्ष 2018 में 38 प्रतिशत हो गया है।
  • वर्ष 2018-19 (P) में भारत के निर्यात-आयात बॉस्केट का स्वरूप
  • निर्यात (पुनर्निर्यात सहित): 23,07,663 करोड़ रुपये।
  • आयातः 35,94,373 करोड़ रुपये।
  • सबसे ज्यादा निर्यात वाली वस्तुओं में पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती पत्थर, दवाएं के नुस्खे, स्वर्ण और अन्य कीमती धातु शामिल रहीं।
  • सबसे ज्यादा आयात वाली वस्तुओं में कच्चा तेल, मोती, कीमती पत्थर तथा सोना शामिल रहा।
  • भारत के मुख्य व्यापार साझेदारों में अमेरिका, चीन, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल रहे।
  • भारत ने वर्ष 2018-19 में विभिन्न देशों/देशों के समूह के साथ 28 द्विपक्षीय, बहु-पक्षीय समझौते किए।
  • इन देशों को कुल 121.7 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का निर्यात किया गया, जो कि भारत के कुल निर्यात का 36.9 प्रतिशत था।
  • इन देशों से कुल 266.9 अरब डॉलर मूल्य का आयात हुआ, जो भारत के कुल आयात का 52.0 प्रतिशत रहा।
  • कृषि और खाद्य प्रबंधन
  • सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) वर्ष 2014-15 में देश के कृषि क्षेत्र ने 0.2 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि से उबरकर 2016-17 में 6.3 प्रतिशत की विकास दर हासिल की, लेकिन वर्ष 2018-19 में यह घटकर 2.9  प्रतिशत पर आ गई।
  • सकल पूंजी निर्माण (जीसीएफ) वर्ष 2017-18 में कृषि क्षेत्र में सकल पूंजी निर्माण 15.2 प्रतिशत घटा। वर्ष 2016-17 में यह 15.6 प्रतिशत रहा था।
  • कृषि में वर्ष 2016-17 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र का जीसीएफ जीवीए के प्रतिशत के रूप में 2.7 प्रतिशत बढ़ा। वर्ष 2013-14 में यह 2.1 प्रतिशत के स्तर पर था।
  • कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 2005-06 के अवधि के 11.7 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2015-16 में बढ़कर 13.9 प्रतिशत हो गई।
  • 89 प्रतिशत भू-जल का इस्तेमाल सिंचाई कार्य के लिए किया गया।
  • लघु और सीमांत किसानों के बीच संसाधनों के इस्तेमाल को अधिक न्याय संगत बनाने के लिए आईसीटी को लागू करना और कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए सक्षम प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी।
  • कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के समग्र और सतत विकास के लिए आजीविकाओं के संसाधनों का वैविधिकरण। इसके लिए नीतियों में इन बातों पर ध्यान देना होगा-
  • दुनिया में दूध के सबसे बड़े उत्पादन देश भारत में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा।
  • पशु धन का विकास।
  • दुनिया में मछलियों के दूसरे बड़े उत्पादक देश भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा देना है।
  • उद्योग और अवसंरचना
  • वर्ष 2018-19 में आठ बुनियादी उद्योगों के कुल सूचकांक में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि।
  • विश्व बैंक के कारोबारी सुगमता रिपोर्ट 2019 में भारत वर्ष 2018 में दुनिया के 190 देशों में 77 वें स्थान पर पहुंचा। पहले की तुलना में 23स्थान ऊपर उठा।
  • वर्ष 2018-19 में देश सड़क निर्माण कार्यों में 30 किलोमीटर प्रति दिन के हिसाब से तरक्की हुई। वर्ष 2014-15 में सड़क निर्माण 12 किलोमीटर प्रति दिन था। वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्ष 2018-19 में रेल ढुलाई और यात्री वाहन क्षमता में क्रमशः 5.33 और 0.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • देश में वर्ष 2018-19  के दौरान कुल टेलीफोन कनेक्शन 118.34 करोड़ पर पहुंच गया।
  • बिजली की स्थापित क्षमता वर्ष 2019 में 3,56, 100 मेगावॉट रही, जबकि 2018 में यह 3,44,002 मेगावॉट थी।
  • सेवा क्षेत्र
  • सेवा क्षेत्र (निर्माण को छोड़कर) की भारत के जीवीए में 54.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और इसने वर्ष 2018-19 में जीवीए की वृद्धि में आधे से अधिक योगदान दिया है।
  • वर्ष 2017 में रोजगार में सेवाओं की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत थी।
  • पर्यटन
  • वर्ष 2018-19 में 10.6 मिलियन विदेशी पर्यटक आए, जबकि वर्ष 2017-18 में इनकी संख्या 10.4 मिलियन थी।
  • पर्यटकों से विदेशी मुद्रा की आमदनी  वर्ष 2018-19 में 27.7 अरब अमेरिकी डॉलर हरी, जबकि 2017-18 में 28.7 अरब अमरिकी डॉलर थी।
  • सामाजिक बुनियादी ढांचा, रोजगार और मानव विकास जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निम्न पर सरकारी व्यय (केंद्र+राज्य)

(i) स्वास्थ्यः वर्ष 2018-19 में 1.5 प्रतिशत वृद्धि की कई, जो वर्ष 2014-15 में 1.2 प्रतिशत थी।

(ii) शिक्षाः इस अवधि के दौरान 2.8 प्रतिशत से बढ़कर 3 प्रतिशत किया गया।

  • ईपीएफओ (EPFO) के अनुसार, औपचारिक क्षेत्र में मार्च, 2019 में रोजगार सृजन उच्च स्तर पर 8.15 लाख था, जबकि फरवरी, 2018 में यह 4.87 लाख था।
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत वर्ष 2014 से अब तक करीब 1,90,000 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के अंतर्गत करीब 1.54 करोड़ घरों का निर्माण कार्य पूरा किया गया, जबकि 31 मार्च, 2019 तक मूलभूत सुविधाओं के साथ एक करोड़ पक्के मकान बनाए गए।
  • सतत विकास और जलवायु परिवर्तन
  • भारत का एसडीजी सूचकांक अंक राज्यों के लिए 42 से 69 के बीच और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 57 से 68 के बीच है।
  • राज्यों में 69 अंकों के साथ केरल और हिमाचल प्रदेश सबसे आगे हैं।
  • केंद्रशासित प्रदेशों में चंडीगढ़ और पुडुचेरी क्रमशः 68 और 65 अंकों के साथ सबसे आगे हैं।
  • किफायती विश्वसनीय और सतत ऊर्जा के माध्यम से समावेशी वृद्धि सक्षम बनाना
  • भारत को वर्ष 2010 के मूल्यों पर अपने वास्तविक प्रति व्यक्ति जीडीपी में 5,000 डॉलर तक की वृद्धि करने और उच्च मध्य आय वर्ग में दाखिल होने के लिए अपनी प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में 2.5 गुना वृद्धि किए जाने की जरूरत है।
  • 0.8 मानव विकास सूचकांक अंक प्राप्त करने के लिए भारत को प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में चार गुना वृद्धि किए जाने की जरूरत है।
  • पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अब भारत चौथे, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पांचवें और नवीकरणीय ऊर्जा संस्थापित क्षमता के क्षेत्र में पांचवें स्थान पर है।
  • भारत में ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों की बदौलत 50,000 करोड़ रुपये की बचत हुई और कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में 108.28 मिलियन टन की कमी हुई।
  • देश में कुल विद्युत उत्पादन में नवीकरणीय विद्युत का अंश (पनबिजली के 25 मेगावॉट से अधिक को छोड़कर) वर्ष 2014-15 के 6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 10 प्रतिशत हो गया।
  • 60 प्रतिशत अंश के साथ तापीय विद्युत अभी भी प्रमुख भूमिका निभाती है।
  • भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बाजार हिस्सेदारी मात्र 0.06 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह 2 प्रतिशत और नॉर्वे में 39 प्रतिशत है।
  • वर्ष 2040 में भारत की जनसंख्या का स्वरूपः 21वीं सदी के लिए जन कल्याण के प्रावधान का नियोजन
  • अगले दो दशकों में जनसंख्या की वृद्धि दर में तेजी से कमी आने की संभावनाएं हैं। अधिकांश भारत जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाएगा, जबकि वर्ष 2030 तक कुछ राज्यों में ज्यादा तादाद बुजुर्गों की होगी।
  • वर्ष 2021 तक राष्ट्रीय कुल गर्भधारण दर, प्रतिस्थापन दर से कम रहने की संभावना है।
  • वर्ष 2021-31 के दौरान कामकाजी आयु वाली आबादी में मोटे तौर पर 9.7 मिलियन प्रति वर्ष और वर्ष 2031-41 के दौरान 4.2 मिलियन प्रतिवर्ष वृद्धि होगी।
  • अगले दो दशकों में प्रारंभिक स्कूल में जाने वाले बच्चों (5 से 14 साल आयु वर्ग) में काफी कमी आएगी।

लेखक-विवेक कुमार त्रिपाठी

संबंधित लिंक भी देखें…

http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=191213

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