सामयिक विषय: रक्षा/विज्ञान संक्षिप्तिकी

Massive Asteroid will zoom near Earth on February 4th – at 76,000 mph

विशालकाय क्षुद्रग्रह

प्रश्न-फरवरी, 2018 में एक विशाल क्षुद्र ग्रह पृथ्वी के समीप से गुजरा/उस क्षुद्र ग्रह का नाम क्या है?
(a) 2002 AP 128
(b) 2002 AJ 129
(c) 2003 AJ 139
(d) 2003 AJ 129
उत्तर-(b)
संबंधित तथ्य

  • 4 फरवरी, 2018 को एक विशालकाय क्षुद्रग्रह (एस्ट्रॉयड) धरती के समीप से गुजरा।
  • इस क्षुद्रग्रह का नाम 2002AJ129 है।
  • यह क्षुद्रग्रह हमारे ग्रह से निकटतम 2.6 मिलियन माइल्स (4.2 मिलियन किमी. की दूरी पर था।
  • इसकी गति 76,000 मील/घंटे (122, 400 किमी./घंटा) थी।
  • यह पृथ्वी के निकटतम क्षुद्रग्रहों की तुलना में तीव्र गति से गुजरा।
  • नासा द्वारा इस क्षुद्रग्रह को संभावित खतरनाक (Potentially Hazardous) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

संबंधित लिंक
https://wattsupwiththat.com/2018/01/20/nasa-massive-asteroid-will-zoom-near-earth-on-february-4th-at-76000-mph/

smallest rocket ever to carry satellite into orbit

विश्व के सबसे छोटे रॉकेट का प्रक्षेपण

प्रश्न-हाल ही में किस देश ने सूक्ष्म उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने में सक्षम विश्व के सबसे छोटे रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया?
(a) चीन
(b) जापान
(c) रूस
(d) फ्रांस
उत्तर-(b)
संबंधित तथ्य

  • 3 फरवरी, 2018 को जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने सूक्ष्म उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने में सक्षम विश्व के सबसे छोटे रॉकेट का सफलता पूर्वक प्रक्षेपण किया।
  • इसे जापान के कागोशिमा प्रांत के यूचीनोरा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया।
  • इस सूक्ष्म रॉकेट का नाम एसएस-520 (SS-520) है।
  • इस रॉकेट के माध्यम से एक अल्ट्रा सूक्ष्म उपग्रह (13.6 इंच लंबा) ट्राईकोम-1 आर (TRICOM-1R) को पृथ्वी की कक्षा में लांच किया गया। जिसका द्रव्यमान मात्र 7 पाउंड है।
  • क्यूबसैट एजेंसी के अनुसार नाममात्र की स्थिति में इसका उपयोग कई कैमरों के माध्यम से पृथ्वी की सतह की छवियों को एकत्रित करने के लिए किया जाएगा।
  • इस रॉकेट की ऊंचाई 10 मीटर और व्यास 50 सेमी. है।
  • प्रारंभ में एसएस-520 को एक साउंडिंग रॉकेट के रूप में डिजाइन किया गया था।
  • यह रॉकेट दूसरी बार लांच किया गया है इससे पूर्व इसे 15 फरवरी, 2017 को लांच किया गया था।

संबंधित लिंक
https://www.japantimes.co.jp/news/2018/02/04/national/science-health/japan-successfully-launches-worlds-smallest-satellite-carrying-rocket/#.WoVKTJ1ubIU
http://www.firstpost.com/tech/news-analysis/japan-launches-worlds-smallest-rocket-with-the-ability-to-put-micro-satellite-into-orbit-4334423.html
https://www.aninews.in/news/world/asia/worlds-smallest-satellite-carrying-rocket-launched201802051526240001/
https://www.engadget.com/2018/02/03/japan-launches-smallest-rocket-ever-to-carry-satellite-into-orbit/

Super Blue Blood Moon

सुपर ब्लू ब्लड मून

प्रश्न-वर्ष 2018 के पहले चंद्रग्रहण के दौरान एशिया में लगभग 35 वर्षों के बाद चंद्रमा तीन रंगों ‘सुपर मून’,‘ब्लू मून’ और ‘ब्लड मून’ में दिखा। इससे पूर्व एशिया में ऐसा संयोग कब हुआ था?
(a) 30 दिसंबर, 1982
(b) 12 दिसंबर, 1982
(c) 30 जनवरी 1982
(d) 15 जनवरी 1982
उत्तर-(a)
संबंधित तथ्य

  • 31 जनवरी को वर्ष 2018 का पहला चंद्रग्रहण लगा।
  • यह पूर्ण चंद्रग्रहण लगभग 76 मिनट तक रहा।
  • चन्द्रमा शाम छह बजकर 21 मिनट से रात सात बजकर 37 मिनट तक पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में रहा।
  • जबकि चंद्रग्रहण की संपूर्ण अवधि ढाई घंटे से भी अधिक रही।
  • ध्यातव्य है कि ‘सुपर ब्लू ब्लड मून’ के दौरान चंद्रमा आम दिनों के मुकाबले अधिक चमकीला और बड़ा दिखाई देता है।
  • इस परिघटना में चांद, पूर्णिमा के चांद से लगभग 30 प्रतिशत अधिक चमकीला और 12 प्रतिशत बड़ा रहता है।
  • चंद्रग्रहण भारत के अलावा विश्व के अन्य हिस्सों यथा इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में भी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हुआ।
  • 31 जनवरी को सुपरमून, ब्लू मून और चंद्रग्रहण ब्लड मून एक ही रात को नजर आए।
  • इस परिघटना को ही ‘सुपर ब्लू ब्लड मून’ कहते हैं।
  • सुपर मून, उस स्थिति में होता है जब चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी सबसे ज्यादा घटती है।
  • इस स्थिति में चंद्रमा बहुत बड़ा और चमकीला दिखता है।
  • ब्लू मून एक ही महीने में दूसरी बार जब पूरा चांद उदय होता है तो उसे ‘ब्लू मून’ कहते हैं।
  • ध्यातव्य है कि दो पूर्णिमाओं के बीच का अंतर 29.5 दिन होता है और एक महीने की औसत लंबाई 30.5 दिन।
  • अतः ढाई-पौने तीन वर्षों में ही एक-बार ऐसा संयोग होता है।
  • ब्लड मून चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी एवं चंद्रमा ऐसी स्थिति में होते हैं कि कुछ समय के लिए पूरा चांद अंतरिक्ष में धरती की छाया से गुजरता है लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते वक्त सूर्य की लालिमा वायुमंडल में बिखर जाती है।
  • बिखरी हुई यह लालिमा चंद्रमा की सतह पर पड़ती है।
  • इसे ही ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।

संबंधित लिंक
https://www.space.com/39432-get-ready-for-super-blue-blood-moon-eclipse.html
http://www.bbc.com/hindi/india-42883382
https://www.ndtv.com/world-news/first-super-blue-blood-moon-in-150-years-as-three-lunar-events-collide-live-updates-1806956

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